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दिल्ली व एनसीआर में प्रदूषण कम करने की कवायद

धुंआ उड़ाती गाड़ियां दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण नहीं फैला सकेंगी। एनसीआर व एनसीटी मिलकर इस मसौदे को अमली जामा पहनाने में जुटी हैं। जिसके तहत प्रदूषण जांच के बगैर दिल्ली अथवा एनसीआर में कोई भी वाहन पकड़ा गया तो उसका चालान होने के साथ-साथ डाटा यातायात प्राधिकरण के पास दर्ज हो जाएगा। लगातार तीन बार इस तरह की गलती पाए जाने पर वाहन को सीज भी किया जा सकता है। इतना ही नहीं पहले से चले आ रहे प्रदूषण जांच केंद्र के अलावा लगभग तीस से अधिक नए अत्याधुनिक जांच केंद्र भी शुरु किये जाने का प्रस्ताव है। जहां इंटरनेट के जरिये वाहनों की प्रदूषण जांच का ब्यौरा यातायात प्राधिकरण को दिया जाएगा।

 यातायात प्राधिकरण के पास दर्ज होने वाले इस ब्यौरे को एनआईसी के जरिये केंद्रीयकृत किया जाएगा। इस पूरे काम में करीब 467 लाख रुपये का खर्च का अनुमान है।
प्रदूषण की रोकथाम के लिए एनसीआर प्लानिंग बोर्ड व एनसीटी की इस केंद्रीयकृत नीति के तहत वर्ष 2011 तक यह प्रणाली लागू कर दी जाएगी। बताया जाता है कि प्रदूषण जांच केंद्र पर दर्ज होने वाले डाटा को एनआईसी द्वारा तैयार किये जाने वाले विशेष सॉफ्टवेयर के मार्फत यातायात प्राधिकरण के कंप्यूटर में दर्ज करने के अलावा सुरक्षित भी कर लिया जाएगा। ताकि जांच के दौरान वाहन के प्रदूषण प्रमाण पत्र की सत्यता का भी पता किया जा सके।
एनसीआर प्लानिंग बोर्ड के एक अधिकारी ने बताया कि इस काम में एनआईसी का खासा महत्व रहेगा। क्योंकि उसके बनाए हुए सॉफ्टवेयर के जरिये ही सभी प्रदूषण जांच केंद्र से यातायात प्राधिकरण का लिंक हो पाएगा। साथ ही डाटा को दर्ज करने व सुरक्षित रखने में भी मदद मिलेगी। इस काम को कुछ माह के भीतर पूरा कर लिया जाएगा।

क्या-क्या होगा काम
-जरूरत पड़ने पर कोई भी यातायात प्राधिकरण-आरटीओ कार्यालय- वाहन की प्रदूषण संबंधित सूचना को देख सकेगा।
-केंद्रीयकृत रहेगा लिंक
-दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण जांच केंद्र भी खोलने का प्रस्ताव
-इलेक्ट्रानिकली सर्वर लिंक के जरिये आपस में जुड़ेंगे आधुनिक प्रदूषण जांच केंद्र

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  • Web Title:दिल्ली व एनसीआर में प्रदूषण कम करने की कवायद