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जब करात से पूछा गया कि उनकी जाति क्या है

मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के महासचिव प्रकाश करात 1968 में जब छात्रवृत्ति पर एडिनबर्ग विश्वविद्यालय में पढ़ने गए थे तब उनसे उनकी जाति के बारे में सवाल पूछे गए थे। यह सवाल पूछा था इतिहास के प्रोफेसर और मार्क्‍सवादी इतिहासकार विक्टर कीरनैन ने। इस इतिहासकार का युवा करात पर प्रारंभिक वर्षों में काफी असर रहा।
    
करात ने शुक्रवार शाम यहां दक्षिण एशियाई अध्ययन केंद्र में आयोजित सम्मेलन में यह खुलासा किया, जहां कई जाने-माने विद्वान, छात्र और कीरनैन के प्रशंसक मौजूद थे। कीरनैन का वर्ष 2009 में निधन हो गया था।
    
कीरनैन से अपनी पहली भेंट को याद करते हुए करात ने कहा कि उन्होंने मुझसे पूछा कि मैं कहां का रहने वाला हूं। मैंने जवाब दिया कि केरल का। उन्होंने मुझसे मेरी जाति पूछी। मैंने कहा कि केरल में मेरी जाति मेनन के नाम से जानी जाती है।

करात ने कहा कि कीरनैन ने कहा था, (यानि) तुम प्रशासनिक सेवा में शामिल होने जा रहे हो। मैंने कहा, मेनन कम्युनिस्ट होते हैं और मैं कम्युनिस्ट सोच से जुड़ा हूं।

करात ने 1970 में एडिनबर्ग विश्वविद्यालय से विज्ञान में स्नातकोत्तर किया और आधुनिक भारत में भाषा और राजनीति विषय पर अपनी थेसिस लिखी। विश्वविद्यालय में अध्ययन के दौरान करात ने रंगभेद प्रदर्शनों में बढ़चढ़कर हिस्सा लिया जिसके लिए उन्हें कथित रूप से निष्कासित भी कर दिया गया था। हालांकि उनके अच्छे आचरण को ध्यान में रखकर बाद में उनका निष्कासन रद्द कर दिया गया।

करात ने कहा कि भारतीय वामपंथ जाति नामक संस्था को खारिज कर ऐतिहासिक भूल की। उन्होंने कहा कि भारत में सार्वजनिक और निजी जीवन में विभिन्न स्तरों पर जिस प्रकार जाति का महत्व बना हुआ है उसे और अन्य नई बातों को सिद्धांत का रूप दिए जाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि इस बात की कमी कीरनैन को बहुत खटकती थी।

करात ने कहा कि कीरनैन पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं में कुछ की यह कहकर आलोचना करते थे कि कैफे जाने वाले ये बुद्धिजीवी राजनीतिक चर्चा में लगे रहते हैं। हालांकि करात ने अपने आप को विद्वानों के गैर विद्वान बताया।

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