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बच्चे की लव लाइफ, टेंशन नहीं पेशेंस रखें

बच्चे की लव लाइफ, टेंशन नहीं पेशेंस रखें

टीनएज में प्यार हो जाना कोई नई बात नहीं है। स्कूल हो या कॉलेज, आज आए दिन प्यार में पागल किशोरों की खबरें बढ़ रही हैं। ऐसी स्थिति में अभिभावकों को समझ ही नहीं आता कि वे किस तरह से अपने बच्चों से पेश आएं।

समय तेजी से बदल रहा है, युग ने आधुनिक करवट ली है। जाहिर है बच्चे अब छोटे नहीं रहे, वे बड़े हो गए हैं। किशोर को जब प्यार हो जाता है तो उनकी सोच यही रहती है कि यही मेरा सच्चा प्यार है लेकिन जब यही सच्चा प्यार उनकी पढ़ाई और जीवन पर असर करने लगता है तो कहीं से भी ठीक नहीं होता। अभिभावक चाहे जो भी समझें, किशोर हमेशा विरोध ही करते हैं। अभिभावक उनका भला ही चाहते हैं, फिर भी किशोरों को लगता है कि वे उनके सबसे बड़े दुश्मन हैं। ऐसे वक्त में न तो बलपूर्वक प्रयोग काम आता है और न ही कोई सलाह! आखिर अभिभावकों को क्या करना चाहिए, जब उन्हें पता चले कि उनका किशोर लाडला या लाडली प्यार में है।

सपनीली दुनिया का जुनून

इस उम्र में किशोरों को जीवन की कठोर सच्चाइयां समझ नहीं आती, उन्हें सब कुछ सपने सरीखा ही लगता है। वे अपनी इसी सपनीली दुनिया में जीना चाहते हैं, जहां सब कुछ चमकता-दमकता है। सबसे पहले तो अभिभावकों को यह समझना होगा कि इस उम्र में विपरीत लिंग की ओर आकर्षित होना आम बात है।

सख्ती से नहीं, प्यार से बनेगी बात

अभिभावक धैर्य नहीं रख पाते और कड़ा रुख अपना लेते हैं। तभी तो खबरें आती हैं कि फलां व्यक्ति ने अपने किशोर बच्चे को कमरे में बंद कर दिया, खाना नहीं दिया, पिटाई की, उसे दोस्तों से मिलने पर पाबंदी लगा दी आदि। यह सब बिल्कुल नहीं होना चाहिए। बेटी हो तो उस पर और दस तरह की पाबंदियां। उसे छोड़ने स्कूल-कॉलेज जाना, वहां से लाना, टूशन ले जाना, यह सब बच्चे को यह सोचने पर मजबूर करता है कि उसके माता-पिता उस पर विश्वास नहीं करते।

कितना सच्चा है उनका रिश्ता

होना तो यह चाहिए कि माता-पिता अपने बच्चे से धैर्य रखने को कहें। उसे समझाते रहें कि जब तक कि वे बड़े नहीं हो जाते, उन्हें कोई एक्शन नहीं लेना चाहिए। उन्हें बताएं कि वे अपना जीवनसाथी चुनने के लिए स्वतंत्र हैं लेकिन इसके लिए उन्हें कई जिम्मेदारियां भी उठानी पड़ेंगी। इतनी जिम्मेदारियों को उठाने के लिए अपने पैरों पर खड़े होना भी जरूरी है। और इसके लिए समय चाहिए। उन्हें बताएं कि किसी भी रिश्ते को फलने-फूलने के लिए समय देना आवश्यक है और यही समय बताएगा कि उनका रिश्ता कितना सच्चा है।

सच का सामना कराएं

अपनी बातचीत में हमेशा प्रैक्टिकल रहने पर ही जोर दें। यह ध्यान रखें कि यदि आप उसे इमोशनली ब्लैकमेल करेंगी या दबाव डालेंगी तो वह उसका विपरीत ही करेगा। आप चाहें तो अपने बच्चे और उसके दोस्त की जीवनशैली में अंतर बता सकते हैं। उसे यह समझा सकते हैं कि जीवन को लेकर दोनों के अलग नजरिए से आगे चलकर उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। आर्थिक सुरक्षा पर जोर डालें। सबसे अहम तो यह कि उन्हें समझ में आना चाहिए कि आप उनकी दुश्मन नहीं बल्कि दोस्त हैं, जिनसे वे किसी भी तरह की बात कर सकते हैं, अपनी भावनाएं बांट सकते हैं। याद यह रखिए कि आपके और आपके बच्चे के बीच की बातचीत बंद न हो।

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