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दस तोला

दस तोला

कहानी: शंकर (मनोज वाजपेयी) पेशे से एक सुनार है। उस पर अपनी मां, बहन और बीमार पिता की जिम्मेदारियां हैं। वह शहर जाकर एक बड़ी ज्वेलरी शॉप खोलना चाहता है, लेकिन जेब में पैसा नहीं है। पैसों की ही अड़चन उसके प्यार की भी दीवार है, जिसके दूसरी ओर है स्वर्णलता (आरती छाबड़िया), जिसे वह चाहता है। स्वर्णलता भी उसे चाहती है, लेकिन इन दोनों का प्यार स्वर्णलता के पिता को मंजूर नहीं। एक दिन स्वर्णलता शंकर से एक दस तोले का मंगलसूत्र बनाने को कहती है। वह उसे बना कर दे देता है। बावजूद इसके वह शंकर से शादी से इनकार कर देती है।
 
निर्देशन : कई निर्देशकों पर आजकल आम आदमी की जिंदगी के दुख-दर्द और हंसी-खुशी को बड़े पर्दे पर दिखाने का शौक चर्राया है, जिसमें से एक निर्देशक अजॉय भी हैं। फिल्म को ग्रामीण परिवेश में ढालने के चक्कर में वह एक अच्छी स्टोरी को भी भूल गये और फिल्म को एक कन्फ्यूजन तक ले गये। फिल्म का आधा से ज्यादा समय केवल भूमिका बांधने और अपनी बात कह देने में गंवा दिया गया है और कब एंड हो जाता है, पता ही नहीं लगता।

अभिनय: केवल मनोज वाजपेयी को छोड़ कर किसी भी किरदार ने एक्टिंग जैसा करने की कोशिश भी नहीं की है। आरती छाबड़िया ने इस फिल्म में अपने रोल के लिए काफी बड़ी-बड़ी बातें की थीं, लेकिन वह भी कुछ खास न कर सकीं।
 
गीत-संगीत :  गीत गुलजार साहब ने लिखे हैं और संगीत संदेश शांडिल्य का है, लेकिन किसी भी एंगल से फिल्म का कोई भी गीत प्रभावित नहीं करता।   

क्या है खास : कुछ भी खास नहीं है, जिसे बयां किया जा सके।  

क्या है बकवास : फिल्म के पात्रों में इतनी ज्यादा नाटकीयता है कि पचा पाना मुश्किल है।

पंचलाइन : ‘दस तोला’ एक टाइम वेस्ट फिल्म है।

सितारे :  मनोज वाजपेयी, आरती छाबड़िया, असरानी 

निर्देशक : अजॉय

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