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पंचायत समिति का गठन, अधिकार एवं कार्य

क्षेत्र में प्रखंड का वह क्षेत्र शामिल नहीं होगा, जो किसी नगर निगम, नगरपालिका, अधिसूचित क्षेत्र या कैन्टोनमेंट बोर्ड के अंतर्गत आता है।
पंचायत समिति का गठन
इसका गठन निम्नलिखित से मिलकर बनेगाः-
पंचायत समिति के क्षेत्रीय निर्वाचन क्षेत्रों से सीधे निर्वाचित सदस्य। पंचायत समिति के अंतर्गत पूर्णत: या अशत: पड़नेवाले निर्वाचन क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करनेवाले एमपी या एमएलए। वैसे राज्यसभा के सदस्य जिनका नाम पंचायत समिति के क्षेत्र के अंतर्गत मतदाता के रूप में दर्ज हो।

पंचायत समिति के प्रादेशिक क्षेत्रों के मुखियों का एक बटा पांचवा भाग चक्रानुक्रम से एक वर्ष के लिए लॉट निकालकर निर्धारित किया जाएगा। परन्तु कोई मुखिया जो पंचायत समिति के अधीन एक अवधि के लिए सदस्य है, दूसरे अवधि के लिए सदस्य नहीं होगा। पंचायत समिति क्षेत्र के अंतर्गत एक विशिष्ट व्यक्ति, जिसे राज्य सरकार मनोनीत करे।

पंचायत समिति के कार्य
एकीकृत ग्रामीण विकास, कृषि, सामाजिक वानिकी, पशुपालन एवं मत्स्य पालन, स्वास्थ्य एवं स्वच्छता, शिक्षा, सहकारिता, कुटीर उद्योग, महिला, शिशु एवं कमजोर वर्गो का कल्याण, रोजगार कार्यक्रम, खेलकूद, भवन निर्माण एवं लघु सिंचाई की योजना बनाकर कार्यान्वयन सुनिश्चित कराना।

पंचायत समिति क्षेत्र के विकास के लिए वार्षिक योजना तैयार कर उसे जिला परिषद को सौंपना। पंचायत समिति का वार्षिक बजट तैयार करना। प्राकृतिक संकट में रिलीफ की योजना बनाकर उसका कार्यान्वयन। कृषि, बागवानी, बीज फार्मा एवं कीटनाशी दवाओं का भंडारण एवं वितरण।

भूमि विकास, भूमि सुधार एवं भू संरक्षण तथा लघु सिंचाई में सरकार एवं जिला परिषद को सहायता करना। मत्स्य पालन का समेकित विकास एवं मार्केटिंग, दूध उद्योग मुर्गी पालन एवं सुअर पालन को प्रोन्नति। सामाजिक, कृषि वानिकी एवं रेशम उत्पादन का समेकित विकास।

ग्रामीण, कुटीर, कृषि एवं वाणिज्यिक उद्योगों के विकास में सहायता करना। ग्रामीण जलापूर्ति योजनाओं की व्यवस्था, मरम्मत एवं अनुरक्षण करना। दो या दो सेअधिक ग्राम पंचायतों के लाभ के लिए ग्रामीण सड़कों, पुल पुलिया एवं नालियों का निर्माण।

सौर ऊर्जा संचालित उपकरणों को अनुदानित दर पर उपलब्ध कराना, वायोगैस संयंत्र का विकास करना। खेलकूद एवं सांस्कृतिक कार्यकलापों के प्रोत्साहित करना तथा ग्रामीण क्लबों की स्थापना में सहायता।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण कार्यक्रमों का समेकित विस्तार। सड़क, तालाब, कुंओं की सफाई, सार्वजनिक शौचालयों का निर्माण समाज के कमजोर वर्गों खासकर एससी,एसटी के विकास के लिए समेकित योजनाओं का निर्माण एवं कार्यान्वयन।

वृद्ध, आसक्त लोगों के लिए पेंशन की व्यवस्था में पंचायतों को सहायता। ग्राम पंचायतों के क्रियाकलापों का समन्वय एवं मूल्यांकन एवं मार्गदर्शन करना। केन्द्र, राज्य सरकार या जिला परिषद के द्वारा सौंपी गयी स्कीमों के निष्पादन को सुनिश्चित करना। अनुसूचित क्षेत्रों में पंचायत समिति को अतिरिक्त शक्तियां दी गयी हैं।

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