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असली खेल का महानायक

आंकड़ों के लिहाज से ब्रेडमैन कहीं आगे दिखते हैं, लेकिन ब्रेडमैन सिर्फ इंग्लैंड और आस्ट्रेलिया के दस मैदानों में खेले हैं, जबकि तेंदुलकर ने आठ देशों में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेला है और वह भी 70 से ज्यादा अलग-अलग मैदानों पर। 

 

सोमवार 11 अक्टूबर को कर्नाटक की राज्य सरकार का भविष्य अधर में टंगा था। सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी को विधानसभा में अपना बहुमत सिद्ध करना था, क्योंकि काफी सारे विधायकों ने विद्रोह कर दिया था। विधानसभा की बैठक शुरू होने से पहले बंगलूर में हर कोई जानता था कि यह मामला काफी उत्तेजक होगा और शायद विस्फोटक भी। कर्नाटक के नागरिक और राजनीति के टिप्पणीकार होने के नाते मैं घर पर रह सकता था और टेलीविजन पर यह नाटक देख सकता था। इसके बजाय मैंने अपने घर से विधानसौध की ओर चलना शुरू किया। लेकिन अपनी मंजिल के लगभग 400 मीटर पहले ही मैं अचानक चिन्नास्वामी स्टेडियम की ओर मुड़ गया, जहां एक दूसरा और निस्संदेह ज्यादा दिलचस्प नाटक शुरू होने वाला था।
पिछली शाम मैं स्टेडियम में मौजूद था और मैंने सचिन तेंदुलकर को आत्मविश्वास के साथ 44 नाटआउट रन बनाते देखा था। यह आस्ट्रेलिया के खिलाफ दूसरे टेस्ट मैच का दूसरा दिन था। तेंदुलकर मुश्किल वक्त में बल्लेबाजी करने आए थे जब भारत ने 478 रन के आस्ट्रेलियाई स्कोर का पीछा करते हुए दो विकेट जल्दी में गंवा दिए थे। तीसरे दिन के पहले ओवर में तेंदुलकर ने दो लेग ग्लांस खेलकर अपना अर्धशतक पूरा किया। उसके बाद उन्होंने आस्ट्रेलिया के सबसे तेज गेंदबाज मिशेल जॉनसन की गेंदों पर दो जोरदार पुल लगाए। इन चार शॉट के बाद आस्ट्रेलियाई कप्तान रिकी पोंटिंग तुरंत रक्षात्मक हो गए। गेंदबाजों से कहा गया कि वे ऑफस्टम्प के काफी बाहर गेंद फेंकें। इसके बावजूद तेंदुलकर ने दो बार गेंदों को एक्ट्रा कवर बाउंड्री के बाहर पहुंचा दिया। तब बाउंड्री पर ज्यादा क्षेत्ररक्षक भेजे गए। रनों की रफ्तार कम हो गई क्योंकि भारतीय इक्का-दुक्का रनों से ही काम चलाने लगे। आस्ट्रेलिया को यह सीरिज बराबर करने के लिए यह मैच जीतना जरूरी था, इसलिए रनों की रफ्तार घटाने भर से काम नहीं चलने वाला था बल्कि विकेट लेना जरूरी था। आखिरकार पोंटिंग ने अपने एकमात्र स्पिनर नाथन हॉरिट्ज को बुलाया ताकि वह टूटती हुई विकेट का फायदा ले सके। लेकिन यह अंदाजा ही निकला जिसे तेंदुलकर के तीन शॉट ने धो डाला, एक ऑफ ड्राइव और लॉग ऑन के ऊपर दो छक्के। इस तरह उनका 49वां टेस्ट शतक पूरा हुआ।
तेंदुलकर ने जब अपना दूसरा छक्का मारा उसके तुरंत बाद लंच हो गया। तेंदुलकर अब रिकी पोंटिंग से दस शतक से आगे थे और सुनील गावस्कर से 15 शतक आगे। क्रिकेट के इतिहास में महानतम माने जाने वाले बल्लेबाज डोनाल्ड ब्रेडमैन से उन्होंने 20 शतक ज्यादा लगा लिए थे। जैसे-जैसे दिन ढलता गया और तेंदुलकर ने आस्ट्रेलियाई गेंदबाजों की पिटाई जारी रखी तो मैंने मुंबई के अनुभवी पत्रकार मकरंद वायगंणकर से पूछा कि बल्लेबाजी के मुंबई स्कूल में तेंदुलकर की जगह कहां है। उन्होंने कहा कि गावस्कर की तरह ही तेंदुलकर की प्रतिभा को स्कूल क्रिकेट पर नजर रखने वाले पारखियों ने जल्दी ही पहचान लिया था। गावस्कर की ही तरह उन्होंने नेट्स पर घंटों बिताए हैं और गावस्कर की ही तरह वे सिर्फ भारत के लिए नहीं मुंबई के लिए भी ढेरों रन बनाने में विश्वास करते हैं। इतिहास में तेंदुलकर की जगह का विश्लेषण करने के बाद वायगंणकर ने कहा कि अपने स्ट्रोक्स की विविधता और विराट उपलब्धियों को देखते हुए तेंदुलकर गावस्कर और मुंबई के अन्य असाधारण बल्लेबाजों से बहुत आगे हैं।
पानी और चाय के अवकाश के दौरान मैंने पूर्व अंग्रेज प्रथम श्रेणी क्रिकेटर और स्तंभकार पीटर रिबक से बात की। रिबक अब आस्ट्रेलिया में रहते हैं और उनके लेख चार महाद्वीपों के कई अखबारों में छपते हैं। रिबक ने तेंदुलकर के कम से कम 15 शतक देखे हैं और वे सोच रहे थे कि वे इन इनिंग्स के बारे में क्या लिखेंगे? उन्होंने कहा कि तेंदुलकर ने ही ये सारे शतक बनाए थे लेकिन ये सारे कितने अलग-अलग हैं। तेंदुलकर की इनिंग्स दूसरे छोर पर खड़े मुरली विजय के लिए इतनी महत्वपूर्ण है। इस य्रुवा खिलाड़ी के लिए बल्लेबाजी में इससे बढ़िया सबक क्या हो सकता है?
फिर बातचीत रिकी पोंटिंग की ओर मुड़ी। पोंटिंग और तेंदुलकर का रिश्ता कुछ वैसा ही है जैसे कभी वाल्टर हेमंड का डॉन ब्रेडमैन के साथ था। हेमंड भी महान बल्लेबाज थे जो अपने से ज्यादा महान समकालीन खिलाड़ी की छाया में रहने को मजबूर थे। प्रेस बॉक्स में मेरे पड़ोस में जो सज्जन बैठे थे वे भी तेंदुलकर के बारे में कुछ कहना चाहते थे। सुरेश मेनन जो शायद अपनी पीढ़ी के सर्वश्रेष्ठ क्रिकेट लेखक हैं। मेनन ने तेंदुलकर को पाकिस्तान के अपने पहले दौरे 1989 में देखा था जब उन्हें चेहरे पर वकार यूनुस की गेंद लगी थी और उसके बावजूद उन्होंने अब्दुल कादिर की गेंदों पर कई सीधे छक्के मारे थे। मेनन को याद है कि उस दौरे पर टीम के मैनेजर वरिष्ठ भारतीय खिलाड़ी चंदू बोर्डे की एक अजीब-सी शिकायत थी। बोर्डे को तेंदुलकर को ठीक नीचे होटल में कमरा मिला था और वे रात में जाग पड़ते थे क्योंकि तेंदुलकर अपने कमरे में बैटिंग का अभ्यास किया करते थे।
मेनन और मैंने तेंदुलकर की ब्रेडमैन से तुलना करके देखी। ब्रेडमैन का औसत 99 से भी ज्यादा है। तेंदुलकर का उनसे 40 से भी कम है। ब्रेडमैन ने सिर्फ 52 टेस्ट में 29 शतक लगाए हैं जबकि तेंदुलकर के 49 शतक 171 टेस्ट में बने हैं। आंकड़ों के लिहाज से ब्रेडमैन कहीं आगे दिखते हैं लेकिन जैसा कि मेनन ने कहा ब्रेडमैन सिर्फ इंग्लैंड और आस्ट्रेलिया के दस मैदानों में खेले हैं जबकि तेंदुलकर ने आठ देशों में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेला है और वह भी 70 से ज्यादा अलग-अलग मैदानों पर। जहां ब्रेडमैन ने सिर्फ टेस्ट क्रिकेट खेला वहीं तेंदुलकर एकदिवसीय मैचों में भी सफलता पाई है। जब हम बात कर रहे थे तब तेंदुलकर शांति से आगे बढ़ रहे थे। खेल की समाप्ति पर वे अपने दोहरे शतक से सिर्फ 9 रन पीछे थे। अगले दिन के अखबारों से पता चला कि उनकी इनिंग्स के आखिरी दौर में कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता सिद्धरमैया भी मौजूद थे। वे इस उम्मीद में विधानसभा गए कि भाजपा सरकार विश्वासमत हार जाएगी और वे मुख्यमंत्री पद के लिए दावा प्रस्तुत करेंगे। उनकी योजना विफल हो गई जब मार्शल की मदद से अध्यक्ष ने विद्रोही विधायकों को अयोग्य घोषित कर दिया। अभी यह मामला हाईकोर्ट में है हालांकि यह तय हो गया कि कांग्रेस और उसके सहयोगी नई सरकार नहीं बना सकते। तब सिद्धरमैया फिर चिन्नास्वामी स्टेडियम के लिए चल दिए जहां तेंदुलकर अब भी खेल रहे थे।
लेखक प्रसिद्ध इतिहासकार हैं।  

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