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गुरमेल को श्रद्धांजलि

गुरमेल सिंह एक ऐसे व्यक्ति थे, जिन पर ब्रिटेन फख्र कर सकता है। गुरमेल की दर्दनाक हत्या एक बर्बर अपराध है और इस पर ब्रिटिश समाज को गंभीरता से विचार करना चाहिए। गुरमेल सिंह भारत से ब्रिटेन तब आए थे, जब वह महज 16 साल के थे और यहां उन्होंने अपनी मेहनत से एक मुकाम हासिल किया। उन्होंने यहां इतने पैसे जमा किए कि हड्डर्सफील्ड में अपनी एक दुकान खोल सकें। स्थानीय लोग उन्हें अपने समुदाय का स्तंभ मानते थे। ठगों ने ऐसे शख्स को मार डाला। गुरमेल सिंह की इस कायरतापूर्ण हत्या पर हम शर्मसार हैं।
डेली मिरर, लंदन 

एक सराहनीय पहल
यूरोपीय संघ की आर्थिक मदद से ढाका में आतंकवाद-विरोधी एक क्षेत्रीय केंद्र खोले जाने की खबर का स्वागत किया जाना चाहिए। हालांकि दक्षिण एशिया में दहशतगर्दी आज जिस रूप में मौजूद है, उसकी तुलना में बांग्लादेश उसके निशाने पर सीधे-सीधे नहीं है, लेकिन आतंकवाद रूपी वैश्विक संकट की हम अनदेखी नहीं कर सकते। वास्तव में, आतंक के स्थानीय तत्व समय-समय पर बांग्लादेश में भी अपने क्रूर चेहरे दिखाते ही रहे हैं और ये तत्व पूरी तरह से देश में पले-बढ़े नहीं हैं। फिर आज के आधुनिक विश्व में कोई भी देश एक टापू की तरह अंतरराष्ट्रीय घटनाओं से अछूता नहीं रह सकता और इन घटनाओं में दहशतगर्दी भी शामिल है। फिर ऐसे सुबूतों की तादाद बढ़ती जा रही है कि पिछले कुछ वर्षो में आतंकियों की शरणस्थली एवं सुगम राह के रूप में बांग्लादेश का इस्तेमाल किया गया। हमें उम्मीद है कि आतंकवाद विरोधी यह क्षेत्रीय केंद्र दहशतगर्दी के खिलाफ साझा जंग में दक्षिण एशियाई देशों के बीच तालमेल और समझदारी पैदा करेगा।
द डेली स्टार, ढाका

 

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