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6 घंटे के जटिल ऑपरेशन से मिला जीवनदान

 जयप्रकाश नारायण एपेक्स ट्रामा के डॉक्टरों ने एक बार फिर मार्ग दुर्घटना में घायल नौजवान को जीवन दान दिया। 3 किलो वजन का 2.5 इंच चौड़ा सरिया युवक की जांघ की हड्डी को तोड़ता हुआ पार निकल गया था। दुर्घटना में जांघ की हड्डी सहित मांसपेशियां व नसें बुरी तरह क्षतिग्रस्त थी। 6 घंटे के जटिल ऑपरेशन में ट्रामा सेंटर के तीन डाक्टरों की टीम ने युवक के बांए पैर में घुसे सरिया को बाहर निकाल दिया।


सजर्री करने वाले प्रमुख सजर्न डॉ. विजय शर्मा ने बताया कि सरिया मांसपेशियों व हड्डी को चकनाचूर करता हुआ उस पार निकल गया था, जिसे खींचकर नहीं निकाला जा सकता। इससे मरीज के पैर की अन्य मांसपेशियां, रक्त वाहिकाएं व्बेकार हो जाती। सजर्री के दौरान डॉक्टरों की टीम ने त्चचा को एक्सप्लोर किया, सरिए को जगह देते हुए मरीज की सजर्री की गई। सरिया पैर की प्रमुख नस से केवल ढाई इंच की दूरी पर था, यदि वहां तक सरिए की पहुंच होती तो मरीज का पैर काटना पड़ता। ट्रामा सेंटर पहुंचने तक दस यूनिट खून बह चुका था। दर्द के कारण मरीज को ओटी में ले जाने से पहले स्ट्रेचर पर ही बेहोश किया गया। क्षतिग्रस्त हड्डी को जोड़ने के लिए सरिया निकालने के बाद मरीज का प्लास्टर किया गया। ऑपरेशन में डॉ. देवेन्द्र पाल सिंह, डॉ. रवि ज्योत व एनेस्थिीयाटिक डॉ. बबीता का विशेष योगदान रहा।

क्या थी जटिलताएं
-सरिया काफी मोटा व लंबा था
-मांसपेशियों में मरीज के कपड़ों का हिस्सा भी धंस चुका था।
-मुख्य रक्तवाहिनी नस को बचाना सबसे बड़ी चुनौती थी।
-जांघ की हड्डी बुरी तरह क्षतिग्रस्त थी, खून काफी बह चुका था

कब-कब मिला जीवनदान
-14 सितंबर-खोपड़ी में घुसे सरिया की सफल सजर्री
-21 अप्रैल- विदेशी निग्रो के दिल और स्पाइनल रॉड में घुसे सरिया को निकाला
-16 मार्च- अमर कॉलोनी में ऑटो-सवार व ट्रक दुर्घटना की जटिल सजर्री
-2008 में सुप्रीतम के पेट में घुसे सरिया की सफल सजर्री

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