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जनता ने चलाया ‘सरकार’ का दरबार

मंगलवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार यहां सचमुच जनता के दरबार में थे। सचमुच का दरबार इसलिए कि जनता ने इसे अपनी मर्जी से चलाया। मुख्यमंत्री ने भी जनता को अपने मन की कर लेने की छूट दे दी थी। नतीजा यह निकला कि कुछ देर के लिए अफरा तफरी मच गई और कुर्सियां जमा करने के नाम पर दो लोगों के सिर में चोटें आईं। यह दरबार पतिलार के हाई स्कूल परिसर में आयोजित था। शुरू में सबकुछ अनुशासित तरीके से चल रहा था।ड्ढr ड्ढr उन्हीं लोगों को परिसर में जाने की क्षाजत थी जिन्होंने पहले की शिकायतों की अर्जियां डीएम के पास लगा रखी थी। उनके पास शिकायतों के नम्बर थे और इसी आधार पर प्रवेश मिल रहा था। मुख्यमंत्री अपने मंत्रियों नरंद्र सिंह, गिरिराज सिंह और रणु देवी के साथ मंच पर आए। आते ही उन्होंने पुलिसकर्मियों को आदेश दिया कि वे बाहर जनता को परिसर में आने दें। इतना सुनते ही हाारों लोग परिसर में घुस गए। प्रेस दीर्घा की ओर भीड़ को बढ़ती देख मुख्यमंत्री ने पत्रकारों को मंच पर बैठने का आमंत्रण दे दिया। फिर कुर्सी पर बैठने के लिए आपाधापी होने लगी। पुलिस ने लोगों से आग्रह किया कि वे जमीन पर बैठें और कुर्सियां जमा कर दें। कुर्सी जमा करने के बदले कुछ लोग इसे फेंकने लगे।ड्ढr ड्ढr इस क्रम में दो लोगों के सिर में चोटें आईं। बेतिया के डीएम दिलीप कुमार बार बार आग्रह कर रहे थे कि आपलोग बैठ जाएं तभी सीएम आपके बीच आएंगे। इधर सीएम मंच छोड़कर लोगों के बीच चले गए। उनका यह प्रयास सफल रहा और लोग शांत होकर अपने कागजात उन्हें थमाने लगे। यह सिलसिला करीब 45 मिनट तक चला। कुछ मामलों में मुख्यमंत्री ने जांच के आदेश दिए और लोगों को भरोसा दिलाया कि उनकी मांगें पूरी हो जाएगी।

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