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रुपये की मजबूती असामान्य नहीं: प्रणव

रुपये की मजबूती असामान्य नहीं: प्रणव

वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने गुरुवार को कहा कि भारतीय शेयर बाजार में विदेशी संस्थानों की ओर से इस समय हो रहा भारी निवेश भारत के प्रति उनके बढते विश्वास को दर्शाता है और इससे फिल हाल कोई चिंता नहीं है क्योंकि कि रुपये की विनिमय दर में कोई असामान्य वृद्धि नहीं हुई है।

   
जी 20 वित्त मंत्रियों की बैठक से पहले यहां मुखर्जी ने कहा रुपये की मजबूती असाधारण नहीं है। रिजर्व बैंक को जब कभी लगेगा कि बाजार में हस्तक्षेप जएरी है वह आगे बढ़कर अपना काम करेगा। लेकिन फिलहाल मुझे इसे लेकर कोई चिंता नहीं है क्योंकि हमारी स्थिति उस तरह की नहीं है।

रिजर्व बैंक ने मजबूत होते रुपये को थामने के लिये पिछले सप्ताह बाजार में हस्तक्षेप किया था। वित्त मंत्री का कहना है कि यदि रुपया लंबे समय तक मजबूत होता रहा तो निर्यात पर इसका असर पड़ सकता है।
   
उल्लेखनीय है कि चालू वित्त वर्ष में अब तक भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 5 प्रतिशत तक मजबूत हो चुका है और इसकी विनिमय दर 44. 36 रुपये प्रति डॉलर के आसपास बनी हुई है।
   
वित्त मंत्री ने कहा विदेशी संस्थागत निवेशकों द्वारा भारतीय पूंजी बाजार में लगाई जा रही पूंजी से भारतीय अर्थव्यवस्था में जारी तेजी का रुझान ही परिलक्षित होता है।  उन्होंने कहा इसकी एक वजह यह भी है कि जब दुनिया के विकसित देशों में आर्थिक हालात में सुधार की गति धीमी बनी हुई है तब ऐसे में जिनके पास निवेश के लिये संसाधन उपलब्ध है उनका रुझान उभरती अर्थव्यवस्थाओं की तरफ बनेगा और भारतीय अर्थव्यवस्था का विश्वास उन्हें अपनी तरफ खींचेगा।

दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थायें जब मंदी के असर से उबरने के लिये संघर्ष कर रही थी तब चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था की वद्धि दर 8. 8 प्रतिशत रही है।

   
भारतीय अर्थव्यवस्था की तेज चाल को देखते हुये ही विदेशी संस्थागत निवेशकों ने यहां इस साल अब तक 1,000 अरब रुपये का निवेश कर दिया है। वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी यहां समूह 20 देशों के वित्त मंत्रियों की बैठक में भाग लेने पहुंचे हैं। 

बैठक की औपचारिक शुरुआत से पहले उन्होंने दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के बीच जारी मुद्रा विवाद को मिलबैठकर सुलझाने पर जोर दिया है। विशेषकर अमेरिका और चीन के बीच मुद्रा विवाद पर उन्होंने चिंता जताई और इसे बातचीत के जरिये सुलझाने की वकालत की।
   
हालांकि, मुखर्जी ने यह भी कहा कि उन्हें नहीं पता कि जी 20 वित्त मंत्रियों की बैठक में कोई इस मुद्दे को उठायेगा अथवा नहीं, इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले में भारत की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि बैठक में किस तरह यह मुद्दा (मुद्रा विवाद का) उठाया जाता है।

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