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एटीएम से चोरी मामले में नहीं मिला फिंगर प्रिंट

बीते 20 दिसम्बर को पटना में राजाबाजार के केशव पैलेस में स्थित आईसीआईसीआई बैंक के एटीएम से 26 लाख 80 हाार रुपये चोरी का मामला सुलझने कीबजाये उलझता ही जा रहा है। पहले यह संभावना थी कि इस एटीएम पर से फिंगर प्रिंट विशेषज्ञों द्वारा लिए गए अंगुलियों के निशान से गुत्थी कुछ सुलझेगी। फोरंसिक जांच के क्रम में यह खुलासा हुआ कि एटीएम पर अंगुलियों के निशान थे ही नहीं। जो कुछ अस्पष्ट निशान मिले भी वह कहीं से संदिग्धों की अंगुलियों से मेल नहीं खा रहे हैं। इससे यह जाहिर है कि जिसने भी चोरी की साजिश रची वह शातिर दिमाग का है।ड्ढr ड्ढr फोरंसिक जांच रिपोर्ट के बाद अब पुलिस भी मानने लगी है कि एटीएम से रुपये चोरी में इसका मेंटेनेंस करने और मशीन में रुपये लोड करने वाली एजेंसी ब्िंा्रग्स आर्या के कर्मचारियों का ही हाथ है। एक आशंका यह भी है कि एटीएम में रुपये डाले ही नहीं गये। सिर्फ दिखावे के लिए चोरी का नाटक रचा गया। एक आशंका यह भी है कि 40 लाख रुपये एक बार में गायब नहीं हुए हैं। यह जाहिर है कि एटीएम में 1000, 500 एवं 100 के नोट डाले जाते हैं उस स्थिति में एक बार में इतने रुपयों का चोरी होना पुलिस को इसलिए नहीं पच रहा है कि सुरक्षा गार्ड के बयान के मुताबिक घटना की रात अपने को एजेंसी का कर्मचारी बताकर सिर्फ एक ही व्यक्ित एटीएम के अंदर घुसा था था।ड्ढr ड्ढr इसी बैंक की बेगूसराय में स्थित एटीएम से भी बीते दो जनवरी को बारह लाख की चोरी हुई। यहां भी मशीन तो जमीन पर गिरी पायी गयी पर उसके कोड लॉक सुरक्षित थे। इससे स्पष्ट था कि कोड के सहार लॉक खोलकर रुपये निकाले गये और बाद मशीन को तोड़कर जमीन पर गिरा दिया गया। एफएसएल की अंगुलांक ब्यूरो की निदेशक अंजना कुमारी ने बताया कि बेगूसराय एटीएम से लिए गए निशानों के मिलान के लिए संदिग्धों के निशान मांगे गए हैं। इधर इस मामले से चिंचित आईसीआईसीआई के प्रवक्ता अमित लाल ने लखनऊ से फोन पर बताया कि कंपनी दोनों मामलों को जांच के अंतिम मुकाम तक पहुंचाएगी।

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