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ऐसा गांव जहां पहली बार मिलेगी दलित को प्रधानी

उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में एक ऐसा गांव है जहां पहली बार दलित प्रधान बनेगा। आजादी के बाद इस गांव में कोई दलित प्रधान नहीं बना था।

राज्य के पिछड़े क्षेत्र के कुशीनगर जिले में कसया विकास खण्ड के सपहा ग्राम पंचायत में अबकी बार दलित के हाथों में इस गांव की प्रधानी होगी। विकास खण्ड में आबादी के हिसाब से इस गांव का नम्बर तीसरा आता है। 4809 मतदाता ग्राम प्रधान के दस प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला करेंगे। सपहा गांव आठ टोलों में विभक्त है जिसमें सरगटिया, नौकाटोला, बेनुआपार, सपहा, मुरलीपुर, लक्ष्मीपुर, भिखारीपट्टी सहित आठ टोलों के मतदाता तीसरे चरण के मतदान में एक सुयोग्य ग्राम प्रधान का चुनाव करेंगे।

इस गांव में पिछड़े जाति के लोगों की जनसंख्या अधिक है। इस गांव की प्रधानी पिछले 25 सालों से राजमंगल यादव के हाथों में थी। उसके बाद पिछले चुनाव में इस गांव की प्रधानी सूर्यभान वर्मा प्रधान के रुप में चुने गए थे। अनुसूचित जाति के इस आरक्षित चुनाव में अनिल, उदयमन, ठग प्रसाद, मदन, रामानन्द, राजेन्द्र प्रसाद, नथुनी, सुनील गौड, संतोष सहित 20 प्रत्याशी मैदान में हैं जिसमें एक प्रत्याशी ऐसा भी है जिसे गांव में चन्दा देकर मतदाता चुनाव लड़ा रहे हैं। अन्य प्रत्याशी मैदान में चुनाव जीतने के लिए सारे हथकंडे अपना रहे हैं।

मतदाताओं को दारु, पैसा व कपड़े बाट कर लुभाने की कवायद जारी है। इस सम्बन्ध में सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी रमाकान्त का कहना है कि परिसीमन के हिसाब से इस बार उक्त गांव में अनुसूचित जाति का आरक्षण है। आयोग हर मामले में शक्त है। कहीं किसी भी लापरवाही को आयोग बर्दाश्त नहीं करेगा।

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