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जोखिम तो जॉन के लिए भी है : पाखी

फिल्म ‘झूठा ही सही’ में हॉट स्टार जॉन अब्राहम के अपोजिट दिख रही एक्ट्रेस पाखी इस फिल्म के निर्देशक अब्बास टायरवाला की पत्नी हैं और फिल्म की लेखक भी।

शादी के बाद एक्ट्रेस के रूप में ब्रेक। क्या इससे आपके करियर पर कोई फर्क पड़ सकता है?

रोज सोचती हूं और दुआ भी करती हूं कि दर्शक इस पर ज्यादा ध्यान न दें और मुझे लगता है कि अब दर्शकों को भी इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। मुमकिन है कि मेरे इस कदम से यहां एक नया ट्रेंड ही शुरु हो जाए।

एक्टिंग की ओर रुझान क्या शुरु से ही था?

जी बिल्कुल। दरअसल मेरी मां थिएटर करती हैं और वह एनएसडी में लेक्चरर भी रह चुकी हैं। तो एक्टिंग की तरफ मन तो शुरु से ही था और मैंने दो फिल्में की भी। जब मैं स्कूल में थी तो मैंने राजन खोसा की इंगलिश फिल्म ‘डांस ऑफ द विंड’ की थी और फिर मैंने ‘यह क्या हो रहा है’ में भी काम किया था। बाद में जब मुझे अच्छा काम नहीं मिला तो मैं दूसरे क्रिएटिव कार्यों में बिजी हो गई।

तो यह फिल्म कैसे मिली?

इस फिल्म की स्क्रिप्ट मैंने लिखी है और जॉन अब्राहम को कहानी सुनाने भी मैं ही गई थी। जब जॉन ने इस फिल्म के लिए हां कह दिया तो प्रोड्यूसर मधु मंतेना ने उनसे कहा कि अब्बास इस फिल्म में कोई नई लड़की लेना चाहते हैं। इस पर जॉन ने कहा कि जो लड़की मुझे स्क्रिप्ट सुनाने आई थी, उसे क्यों नहीं ले लेते। जब जॉन को बताया गया कि वह अब्बास की वाइफ है तो वह हैरान हुए, पर बोले कि उससे क्या फर्क पड़ता है, रोल के लिए तो परफैक्ट है ना।

क्या अब्बास आसानी से मान गए थे?

अब्बास कभी भी मेरे एक्टिंग करने के खिलाफ नहीं रहे। उन्होंने इस रोल के लिए मेरा ऑडिशन लिया और संतुष्ट होने के बाद ही मुझे इस फिल्म में लिया। 

अब्बास के साथ कैसा लगा?

सच कहूं तो सेट पर हमने कभी सोचा ही नहीं कि हम पति-पत्नी हैं। वह बस मेरे बॉस होते थे।

मन में यह कभी नहीं आया कि घर चलो, फिर बताती हूं?

(हंस कर) नहीं, बिल्कुल नहीं।

अब्बास के सामने रोमांटिक सीन करते हुए कुछ खटका-सा नहीं रहा मन में?

इस फिल्म को ‘यू’ सर्टिफिकेट मिला है। अब्बास ने एक फैमिली फिल्म बनाई है। रहे है। फिल्म में ऐसा कोई सीन नहीं है, जो मुझे या अब्बास को असहज करता।

आपके किरदार मिष्का की क्या खासियत है?

यह एक ऐसी लड़की है, जो बहुत जिंदादिल है, लेकिन जिंदगी के एक नाजुक मोड़ पर बिखर सी जाती है।

फिल्म की लेखिका होने के नाते क्या ये सब आसान था?

एक तरीके से था, क्योंकि मैं मिष्का को अच्छी तरह से जानती थी। पर मुश्किल भी था, क्योंकि मिष्का मेरी पर्सनेलिटी से एकदम अलग है।

जॉन अब्राहम की सोलो हीरो के रुप में कोई खास मार्केट नहीं मानी जाती। उनके साथ आना क्या आपके लिए जोखिम भरा नहीं है?

यह मेरे लिए उतना ही जोखिम भरा है, जितना जॉन के लिए एक शादीशुदा हीरोइन के साथ काम करना। तो, हम दोनों ने ही जुआ खेला है। उम्मीद है, दर्शक इन बातों पर ध्यान न देकर इस फिल्म को इसकी कमियों और खूबियों पर आंकेंगे।

तो आगे क्या बने रहना चाहेंगी-राइटर, एक्ट्रेस या दोनों?

देखिए राइटर तो मैं हमेशा रहूंगी। एक्ट्रेस रहूंगी या नहीं, यह दर्शक तय करेंगे। दर्शकों का जैसा रिस्पांस आएगा, उसके बाद जैसे ऑफर आएंगे, उसी से ही सब तय होगा।

बतौर राइटर और भी कुछ कर रही हैं?

जी हां, मेरी दो स्क्रिप्ट तैयार हैं। एक थ्रिलर है और एक आपसी रिश्तों पर है।

डायरेक्शन की तरफ जाने का विचार है?

बिल्कुल नहीं। बहुत मेहनत का काम है यह।

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