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‘गबरघिचोर’ से गिरा थियेटर फेस्टिवल का पर्दा

भिखारी ठाकुर की प्रसिद्ध रचना ‘गबरघिचोर’ पर आधारित नाटक के मंचन के साथ ही मंगलवार को सात दिवसीय पटना थिएटर फेस्टिवल का पर्दा गिरा। स्व. अनिल कुमार मुखर्जी की वीं जयंती पर बिहार आर्ट थिएटर द्वारा आयोजित फेस्टिवल के आखिरी दिन दो रंगकर्मियों को उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए शिखर सम्मान दिया गया। उद्योग मंत्री दिनेश चंद्र यादव के हाथों सीतामढ़ी की डा.पूनम झा व कोलकाता के सब्यसाची बिश्वास को शिखर सम्मान मिला।ड्ढr ड्ढr कालिदास रंगालय में आयोजित समापन समारोह को संबोधित करते हुए उद्योग मंत्री श्री यादव ने कहा कि कालिदास रंगालय ने राज्य ही नहीं बल्कि देश को कई बेहतरीन कलाकार दिए हैं। यहां पर रहकर रंगकर्मियों ने जो कुछ सीखा व समझा उससे देश व समाज को भी लाभान्वित किया है।ड्ढr ड्ढr सामाजिक उलझनों को सुलझाने में रंगकर्मियों की भूमिका उल्लेखनीय रही है। इस अवसर पर लायंस क्लब पटना प्रियदर्शिनी की अध्यक्ष प्रमलता गुप्ता, बैट के सचिव आरपी तरुण, अजीत गांगुली व कुमार अनुपम ने भी अपने विचार रखे। इस मौके पर सुधी दर्शकों ने दानापुर रल मंडल सांस्कृतिक संघ की प्रस्तुति गबरघिचोर का पूरा आनन्द लिया। कलाकारों द्वारा देसी स्टाइल व अपनी माटी की भाषा भोजपुरी में संवादों के संप्रषण ने दर्शकों को विभोर कर दिया। एक गंभीर विषय को निर्देशक अरुण सिंह पिंटू ने हल्के-फुल्के अंदाज में पेश कर लोगों को लोटपोट कर दिया। गलिज की भूमिका में शिव कुमार पासवान, गड़बड़ी -राजेश कुमार, गलिजबो-शिखा सिन्हा, गबरघिचोर-आदित्य सुमन,बटोही-राजेश कुमार शर्मा व सूत्रधार की भूमिका में रंजन कुमार सिंह जमे। संगीत-बबलू कुमार, गायन-रखा सिन्हा, रूपसज्जा-जयप्रकाश मिश्रा, प्रकाश-उदय कुमार का था।

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