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अगर भरोसा है तो..

आज उन्होंने अपनी टीम से लंबी मीटिंग की। वह एक-एक साथी से बात कर रहे थे। उन्हें समझने की कोशिश कर रहे थे। एक को बुला कर तो उन्होंने कहा, ‘यार, तुम्हें तो किसी पर भरोसा ही नहीं है। उसके बिना कैसे चलेगा?’
मैनेजमेंट गुरु मार्क गूलस्टोन का मानना है कि भरोसा नहीं करके हम कहीं नहीं पहुंचते। उससे हम सनकी ही नहीं होते। हममें धीरे-धीरे कड़वाहट भी भर जाती है। गूलस्टोन ने कमाल की किताब लिखी है, ‘जस्ट लिसन: डिस्कवर द सीक्रेट टू गेटिंग थ्रू टू ऐब्सलूटली ऐनीवन।’
हम बार-बार भरोसा करते हैं। कुछ भरोसे हमारी उम्मीदों पर खरे उतरते हैं। कुछ में हम धोखा खा जाते हैं। लेकिन क्या हम बिना भरोसे के जी सकते हैं? जिंदगी जीने के लिए हमें अपने पर भरोसा करना होता है। दूसरों पर भरोसा करना पड़ता है। यह हो सकता है कि भरोसा करने से पहले हम पूरी पड़ताल कर लें।  लेकिन भरोसा तो करना ही होगा। उस भरोसे के बिना हम जिंदगी में एक कदम भी नहीं चल सकते। असल में हमारी जिंदगी भरोसे पर ही चलती है। जब हम परेशान होते हैं, तो कहते हैं कि हमारी जिंदगी तो रामभरोसे है। अपने भरोसे हो या रामभरोसे जिंदगी चलाने के लिए तो भरोसा चाहिए ही।
कुछ लोग होते हैं जिन्हें किसी पर भरोसा नहीं होता। वे हर किसीको शक की निगाह से ही देखते हैं। लेकिन वे भी कहीं न कहीं भरोसा करते हैं। उसके बिना जिंदगी जीने में परेशानी होती है। कभी-कभी तो भरोसा न करने की आदत हो जाती है। और एक दिन हम अपने पर ही भरोसा खो बैठते हैं। अपने पर भरोसा बना रहे, उसके लिए भी दूसरों पर भरोसा करने की जरूरत होती है। दरअसल, जो अपने पर भरोसा करता है, उसे दूसरों पर भरोसा करने में कोई दिक्कत नहीं होती। जाहिर है ऐसे लोग जिंदगी में कड़वाहट भरे नहीं होते।

 

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