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गोवा में फिर यूथ ब्रिगेड पर रहेंगी नजरें

गोवा में फिर यूथ ब्रिगेड पर रहेंगी नजरें

विराट कोहली की अगुआई में विशाखापत्तनम में यूथ ब्रिगेड के दमदार प्रदर्शन से सीरीज में 1-0 की बढ़त बनाने के बाद भारत की नजरें मडगांव के फटोर्डा के नेहरू स्टेडियम में 24 अक्टूबर को होने वाले तीसरे और अंतिम वनडे में एक बार फिर युवा धुरंधरों पर होगी।

फटोर्डा का नेहरू स्टेडियम भारत के लिए भाग्यशाली नहीं रहा और उसने लगभग डेढ़ दशक के इंतजार कि बाद यहां तीन अप्रैल 2006 को इंग्लैंड के खिलाफ पहली बार बार जीत का स्वाद चखा जबकि इससे पहले तीन मैचों में उसे शिकस्त का सामना करना पड़ा।

भारत ने हालांकि इंग्लैंड को हराने के बाद 14 फरवरी 2007 को इसी मैदान पर श्रीलंका को भी हराया। दूसरी तरफ आस्ट्रेलिया के लिए यह मैदान भाग्यशाली रहा है और उसने यहां खेले अपने दोनों एकदिवसीय मैचों में जीत दर्ज की है जिसमें उसने एक मैच में मेजबान को हराया जबकि इस मैदान पर 25 अक्टूबर 1989 को हुए पहले मैच में उसने श्रीलंका को शिकस्त दी थी।

सचिन तेंदुलकर, वीरेंद्र सहवाग, गौतम गंभीर, जहीर खान और हरभजन जैसे अनुभवी खिलाड़ियों की गैर-मौजूदगी में भारतीय उम्मीदों का दारोमदार एक बार फिर विशाखापत्तनम में शतकीय पारी खेलने वाले कोहली, कप्तान महेंद्र सिंह धोनी और युवराज सिंह जैसे अनुभवी बल्लेबाजों के अलावा गेंदबाजी में आशीष नेहरा पर होगी जबकि टीम इंडिया की यूथ ब्रिगेड एक बार फिर अपनी क्षमता दिखाने को बेताब होगी।

भारत की मौजूदा टीम की बात करें तो युवराज ने इस मैदान पर तीन मैचों में 47.66 की प्रभावी औसत से 143 रन बनाए हैं जबकि धोनी के नाम दो मैचों में 80 की औसत से इतने ही रन दर्ज हैं। युवराज ने इंग्लैंड के खिलाफ इस मैदान पर भारत की जीत में अहम भूमिका निभाते हुए 103 रन की पारी खेली थी और टीम इंडिया को एक बार फिर उनसे इसी दमदार प्रदर्शन की उम्मीद होगी जिससे कि मेजबान देश नेहरू स्टेडियम पर जीत की हैट्रिक पूरी कर सके।

युवराज के अलावा इस मैच में सुरेश रैना ने भी 61 रन की अहम पारी खेली थी और दूसरे वनडे में नाबाद 71 रन की आतिशी पारी के बाद उन्हें सीरीज के अंतिम मैच में भी अपने बल्ले का जलवा दिखाने की उम्मीद होगी। इसके अलावा रोहित शर्मा, सौरभ तिवारी, शिखर धवन और मुरली विजय की जैसे युवा खिलाड़ियों से टीम को बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद होगी।

गेंदबाजी की बात करें तो नेहरा और एस श्रीसंत के अलावा भारत के अन्य गेंदबाजों को अधिक अनुभव नहीं है जबकि इस मैदान की बात करें तो मौजूदा टीम में शामिल किसी भी गेंदबाज को यहां अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने का अनुभव नहीं है जो भारत के लिए चिंता का सबब हो सकता है।

दूसरी तरफ, इस मैदान पर जीत की हैट्रिक पूरी करने के इरादे से उतरने वाली आस्ट्रेलियाई टीम की अनुभवहीना उसकी परेशानी बड़ा सकती है। आस्ट्रेलिया ने भले ही इस मैदान पर अपने दोनों मुकाबले जीते हो लेकिन उसकी मौजूदा टीम में ऐसा कोई खिलाड़ी नहीं है जो उस टीम का हिस्सा रहा हो।

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