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ग्रामीण क्षेत्रों में समृद्धि से बढ़ रही है खाद्य मुद्रास्फीति : मोंटेक

जैसे जैसे आय और समृद्धि बढ़ती है उसके साथ मांग भी बढ़ती है और फिर दाम भी चढ़ते हैं। योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिहं अहलुवालिया की मानें तो ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों की आय और समृद्धि बढ़ने से खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ी है और यही वजह है खाद्य मुद्रास्फीति लगातार उंची बनी हुई है।

हालांकि, अहलूवालिया ऊंची खाद्य मुद्रास्फीति से भी चिंतित हैं। उनका कहना है कि दो अक्टूबर को समाप्त सप्ताह में यह 16. 37 प्रतिशत पर थी और अब 9 अक्टूबर को समाप्त सप्ताह में यदि 15. 53 प्रतिशत पर है तब भी यह काफी उंचाई पर है। उन्होंने कहा यदि ग्रामीण आय बढेगी, तो ज्यादा लोग सब्जियां और फल खरीदेंगे और उनकी कीमतें ऊपर चढेंगी। खाद्यान्न की वजह से मुद्रास्फीति उंची नहीं है, खाद्यान्न की कीमतें फिलहाल नरमी में हैं, मुद्रास्फीति में यह दबाव दूध, फल और सब्जियों की वजह से बना है।

संवाददाताओं से बात करते हुए आहलुवालिया ने विश्वास जताया कि नवंबर में खाद्य वस्तुओं की मुद्रास्फीति में तेज गिरावट देखने को मिलेगी। इससे पहले अर्थशास्त्रियों ने भविष्यवाणी की थी कि आपूर्ति में सुधार के साथ ही मुद्रास्फीति में भी गिरावट आ जायेगी।
 
पिछले तीन महीनों के दौरान उत्तरी और उत्तरपूर्वी राज्यों में भारी वर्षो से खाद्य वस्तुओं की आपूर्ति गड़बडा गई थी। क्रिसिल के डी़के जोशी के अनुसार आपूर्ति की गड़बडी अब धीरे धीरे दूर हो रही है, इससे मुद्रास्फीति को नीचे लाने में मदद मिलेगी। मुझे उम्मीद है कि दिसंबर तक खाद्य मुद्रास्फीति एक अंकीय रह जायेगी।

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