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सैर सपाटा: चली मैडमों की टोली

सैर सपाटा: चली मैडमों की टोली

‘घूमने-फिरने का मन तो खूब करता था, लेकिन कोई साथ चलने वाला नहीं था। हमने कॉलोनी की अपने जैसी कुछ महिलाओं का ग्रुप बनाया और घूम आईं चार धाम। हमें कोई दिक्कत नहीं हुई।’ यह अनुभव है फरीदाबाद की एक 50 वर्षीय शिक्षिका सरला गुप्ता का।

44 वर्षीया अपर्णा पाल चौहान को घूमने का खूब शौक है, लेकिन पति के पास समय नहीं। कभी-कभार परिवार के साथ यात्रा करनी पड़ती थी। उसमें भी दूसरों की मर्जी व खुशी का ध्यान रखते हुए सब कुछ प्लान करना पड़ता। उन्हें अपनी मर्जी, अपने तरीके से घूमने का आनन्द उठाने का मौका नहीं मिल पाता था। ऐसे में उन्होंने एक क्लब के बारे में सुना, जो ऐसी ही अकेली महिलाओं को ग्रुप में टूर पर ले जाता है। फिर क्या था, उन्होंने उस क्लब की सेवा ली और घूमने-फिरने का आनन्द उठाने लगीं।

ये दो अनुभव महानगरों में पर्यटन की शौकीन महिलाओं के बीच उभरते नए ट्रेंड की ओर इशारा करते हैं। यदि आप भी अकेली हैं और ग्रुप में यात्रा करने की इच्छुक हैं तो अपनी सुविधा के अनुसार यात्रा पर जाने की योजना बना सकती हैं। ऐसी यात्राओं के बारे में बता रही हैं सुमन बाजपेयी।

सपनों को लगते हैं पंख

कुछ समय पहले तक एडवेंचर की खातिर विभिन्न गतिविधियों में भाग लेना या देश-विदेश की यात्राएं अकेले करना केवल पुरुषों के लिए ही संभव माना जाता था, पर आज महिलाओं का अकेले यात्रा करने का ट्रेंड जोर पकड़ रहा है। अधिक से अधिक महिलाएं एडवेंचर स्पोर्ट्स, चाहे वह माउंटेनियरिंग हो, रिवर राफ्टिंग या ट्रैकिंग, हर तरह की घुमक्कड़ी में खूब दिलचस्पी ले रही हैं। कामकाजी महिलाएं तो विभिन्न ट्रैवल क्लबों द्वारा चलाए जाने वाले पैकेज का लाभ उठाते हुए घूम-फिर रही ही हैं, अन्य गृहिणियां भी ग्रुप बना कर यात्रा का आनन्द उठा रही हैं।

वाओ (डब्ल्यूओडब्ल्यू) यानी ‘वुमन ऑन वैंडरलस्ट’ एक ट्रैवल क्लब है, जिसकी नींव डाली सुमित्र सेनापति ने। उन्हें बहुत ही अच्छा रेस्पांस मिला। खुद घूमने की शौकीन व ट्रैवल राइटर सुमित्र कहती हैं, ‘बरसों तक मैं देश-विदेश की यात्रा करती रही और उसी दौरान मुझे एहसास हुआ कि ऐसी अनगिनत महिलाएं जो अकेली हैं या जिनके पति के पास उन्हें घुमाने का समय नहींहै, वे ट्रैवल करने के लिए किसी न किसी कंपनी की तलाश में लगी रहती हैं। तब मैंने पांच साल पहले इस क्लब को बनाया।’

टेंशन फ्री हॉलीडे

पैकेज लेने का सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि समय की बचत होती है, साथ ही बिना किसी भाग-दौड़ व परेशानी के हर इंतजाम हो जाता है। एयर टिकट से लेकर वीजा, रहने की जगह, पिक एंड ड्रॉप, खाना, घूमना व गाइड सब पैकेज में शामिल होता है, इसलिए यात्रा का भरपूर आनंद आता है। योजनाबद्घ होने के कारण ये टूर किसी रोमांचक व सुखद अनुभव से कम नहींहोते। यात्रा के दौरान बहुत सारी एक्टिविटीज भी प्लान की जाती हैं, जिससे सफर का मजा कई गुना बढ़ जाता है।

सुविधा भी, सुरक्षा भी

अब किसी तीर्थयात्रा या शहर में ही कहीं आउटिंग पर जाने तक ही इन महिलाओं की यात्रा सीमित नहीं रही। न ही वे आज दूसरों की मर्जी के अनुसार अपना हॉलीडे प्लान करने को तैयार हैं। बिजनेस एग्जिक्यूटिव से लेकर कॉरपोरेट वर्ल्ड में काम करने वाली तक, हर प्रोफेशन से जुड़ी महिला आज ट्रैवल कर रही है। मददगार साबित होने वाले वुमन क्लबों की तेजी से बढ़ती संख्या से भी यह स्पष्ट होता है। सबसे खास बात तो यह कि ये क्लब महिलाओं के लिए महिलाओं द्वारा ही चलाए जा रहे हैं।
ऑल वुमन ट्रैवल ग्रुप भी ऐसा ही एक क्लब है। यह उन महिलाओं के लिए एक बेहतरीन विकल्प है, जो ट्रैवल तो करना चाहती हैं, पर अकेले नहीं। सबसे बड़ी बात है कि सुरक्षा की दृष्टि से ऑल वुमन क्लब की अपनी ही खूबियां हैं। दादर, मुंबई स्थित  ‘गल्र्स ऑन द गो’ क्लब महिलाओं के लिए डोमेस्टिक और इंटरनेशनल दोनों तरह के पैकेज प्लान करता है। इसका संचालन करने वाली पिया बोस देसाई शॉर्ट वीकएंड ट्रिप भी ऑर्गेनाइज करवाती हैं। लद्दाख, भूटान, इजिप्ट, टर्की आदि के ट्रिप ऑर्गेनाइज करवा चुकी देसाई के लिए कस्टमाइज्ड पैकेज ज्यादा महत्त्वपूर्ण हैं।

वुमन ऑन क्लाउड्स क्लब को एक इंटरनेशनल एयरलाइन में एयर होस्टेस शीरीन मेहता संचालित करती हैं। दिल्ली के गुलमोहर पार्क में इस क्लब का गठन करने के पीछे उनका उद्देश्य स्पष्ट था। उन अकेली औरतों के लिए बहुत ही सुविधाजनक, केयरफ्री ट्रैवल ऑप्शन उपलब्ध कराना, ताकि वे घूमने के लिए घर के किसी सदस्य पर निर्भर न रहें। वह कहती हैं कि बिना किसी रोक-टोक के अपने ढंग से जीने की आजादी इन महिलाओं को ऐसे सफर में मिलती है।

आईबीएक्स एक्सपीडीशन की डायरेक्टर अनीता सिंह सोनी का कहना है कि उनकी कंपनी जो वुमेंस एडवेंचर टूर आर्गेनाइज करती है, का लाभ उठाने के लिए हर उम्र व प्रोफेशन की महिलाएं आती हैं। मुंबई के केसरी टूर ने जब माई फेयर लेडी टूर्स लांच किए तो महिला यात्रियों की भीड़ लग गई। कंपनी की चेयरपर्सन वीना पाटिल के अनुसार छात्राएं, अकेली रहने वाली महिलाएं, हाफस वाइफ्स, दादी-नानी आदि तक इन पैकेज का लाभ उठा रही हैं। अपनी तरह से अपने सपनों व एडवेंचर की खातिर आज महिला अकेली ही चल दी है दुनिया एक्सप्लोर करने।

शिमला स्थित एडवेंचर हिल्स की संध्या त्यागी भी आपकी यात्रा को प्लान कर देंगी। उन्होंने लगभग सात साल पहले हिमाचल टूरिज्म के साथ अपने क्लब को रजिस्टर करवाया था। आज उनके क्लब का लाभ उठाने वाली महिला ट्रैवलर्स में दुनियाभर की महिलाएं शामिल हैं। इनमें सम्पन्न महिलाएं भी हैं और मध्यमवर्गीय परिवार की महिलाएं भी संध्या के क्लब का लाभ उठा रही हैं। इतना ही नहीं, आईआरसीटीसी की सहायता से भी महिलाएं ग्रुप में ऐसी यात्राएं प्लान कर रही हैं।

वाओ क्लब के आगामी पैकेज

13 नवंबर श्रीलंका व मालदीव, 27 नवंबर ऋषिकेष रिवर राफ्टिंग व यहां उपलब्ध ऐसे अन्य पैकेज का लाभ उठाया जा सकता है । ये पैकेज सामान्यतया 12,000 से लेकर 1,15,000 रुपए के बीच के होते हैं, जिनकी विस्तृत जानकारी वाओ क्लब की वेबसाइट से ली जा सकती है।

बजट, नो प्रॉब्लम

क्लब का चार्ज टूर विशेष पर निर्भर करता है, जो 10 हजार रुपए भी हो सकता है और एक लाख रुपए से अधिक भी। अगर आप खुद ग्रुप बना कर टूर पर निकलती हैं तो सारे खर्च को आपस में बांट लेंगी। इस तरह 2,000 से 10,000 रुपए के बीच खर्च कर आप यात्रा का यादगार अनुभव प्राप्त कर सकती हैं।

कुछ प्रमुख क्लब्स की वेबसाइट
http://www.wowsumitra.com
http://womentravelclub.in
www.womentraveltips.com

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