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निर्मोही अखाड़े का दावा, राम मंदिर बनाएंगे हम

निर्मोही अखाड़े ने विश्व हिन्दू परिषद से दूरी बनाते हुए बुधवार को कहा कि राम मंदिर के निर्माण का अधिकार उसका है और वह सम्पूर्ण विवादित भूमि पर मालिकाना हक पाने के लिए उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाएगा।

गौरतलब है कि निर्मोही अखाड़ा अयोध्या में रामजन्म भूमि़-बाबरी मस्जिद के विवादित स्थल पर मालिकाना हक के मुकदमे में प्रमुख पक्षकार है और इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले के अनुसार विवादित भूमि के एक तिहाई हिस्से का मालिक है।

निर्मोही अखाड़े के महंत भास्कर दास ने बुधवार को संवाददाताओं से कहा कि राम मंदिर के निर्माण का अधिकार निर्मोही अखाड़े के न्यास को है इसलिए यह रामलला निर्मोही अखाड़े के हैं और अखाड़ा सारी विवादित भूमि पर मालिकाना हक पाने के लिए उच्चतम न्यायालय जाएगा।

विहिप की संत उच्चाधिकार समिति की आज दिन में हुई बैठक में लिए गए इस निर्णय को खारिज करते हुए कि मंदिर का निर्माण रामजन्म भूमि न्यास कराएगा तो भास्कर दास ने कहा कि रामजन्म भूमि न्यास को मंदिर बनाने का अधिकार नहीं है।

उन्होंने कहा कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने निर्मोही अखाड़े के दावे को सही ठहराया है और इसे एक तिहाई हिस्से का मालिक बताया है इसलिए मंदिर निर्माण का अधिकार निर्मोही अखाड़े के न्यास को है न कि किसी अन्य न्यास को। उन्होंने यह भी कहा कि निर्मोही अखाड़ा शुरू से ही विवादित भूमि पर राम मंदिर के लिए अदालत में मुकदमा लड़ता रहा है और जिस तरह अन्य पक्ष अपने-अपने दावे को लेकर उच्चतम न्यायालय में जाने की तैयारी में हैं। अखाड़ा भी सारी भूमि पर अपने दावे को लेकर उच्चतम न्यायालय में जाएगा।

विवाद को बातचीत के जरिए आपसी सहमति से निपटाने के लिए चल रहे प्रयासों के बारे में भास्कर दास ने कहा कि मुस्लिम पक्ष से आग्रह किया जा रहा है कि वे विवादित स्थल पर अपना दावा छोड़ दें क्योंकि वहां मस्जिद निर्माण से विवाद बना रहेगा जो राष्ट्रहित में नहीं होगा। सवालों के जबाव में उन्होंने साफ किया कि निर्मोही अखाड़ा हमेशा विश्व हिन्दू परिषद से दूर रहा है।

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