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मां ने बेटी को दिया जन्म, पिता का पता नहीं

एक ओर जहां पूरा देश नवरात्र में मां दुर्गा के आठवें स्वरूप महागौरी की पूजा अर्चना कर मानव कल्याण की कामना कर रहा था वहीं बामनीखेड़ा गांव में एक ऐसी अभागी बच्ची ने जन्म लिया जिसको पहचान देने वाला कोई नहीं है।

कुदरत को शायद यही मंजूर था कि वह धरती पर जब आंख खोलेगी तो अपनी पहचान के लिए तरसेगी। किस वहशी दरिंदे ने उसे इस हालत में धरती पर आने को मजबूर किया। यह कहानी उस अभागी नवजात बच्चाी की है, जो पांच दिन पहले बामनीखेड़ा गांव के जंगल में मंदबुद्धि मां की कोख से जन्म लिया है। अभागी मां इस हालत में कि उसे खुद अपने बारे में कुछ भी पता नहीं, बाप की जानकारी की बात दो दूर की है। फिलहाल यह बच्चाी अब एक मजदूर दंपत्ति के यहां पल रही है।

बामनीखेड़ा गांव के रेलवे फाटक स्थित तालाब केपास पांच दिन पहले एक मंदबुद्धि युवती (22) प्रसव पीड़ा से तड़प रही थी। वहां रहने वाली मजदूर दंपत्ति राजेश कौर जब तक उसे अपनी झोपड़ी में लाती वह एक सुंदर बच्चाी को जन्म दे चुकी थी। उक्त दंपत्ति ने दाई बुलाकर नाड़ा कटवाया और साफ-सफाई कर कपड़े पहनाये। जन्म देने वाली अभागी मां की मानसिक दशा इस कदर खराब है कि वह खुद अपने बारे में कुछ नहीं बता पाती है। किसी वहशी दरिंदे ने मानवता को शर्मसार किया, यह सोचकर गांववाले सकते में हैं। युवती बच्ची को जन्म देने के बाद एक-दो दिन वहां रही और फिर लापता हो गई। अब तक उस युवती के बारें में कुछ भी पता नहीं चल पाया है। बच्ची पूरी तरह से स्वस्थ्य है। मजदूर दंपत्ति की बहू मिलन अपने तीन अन्य बच्चाों के साथ उसका भी पालन-पोषण कर रही है।

मदद की है दरकार- बच्ची को पालने वाली दंपत्ति को एक अदद मदद की दरकार है। राजेश कौर का कहना है कि उसने मानवतावश बच्चाी को अपने पास रखा है। लेकिन महंगाई के इस युग में वह कैसे उसका पालन पोषण करेगी। गांव के सरपंच राधारमण का कहना है कि उन्हें इस वाकये की जानकारी है लेकिन अभी तक प्रशासन को इसकी जानकारी नहीं दी है। उन्होंने जन्म देने वाली युवती की आस-पास के गांवों में तलाश कराने की बात कही।

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