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गमले चुराने वाले

राष्ट्रमंडल खेल खत्म हो गए। कुछ लोग वे गमले मय पौधों के चुरा कर ले जाने की कोशिश करते पकड़े गए। संभव है कुछ लोग सफलतापूर्वक चोरी कर चुके हों और पकड़े न गए हों। पकड़े गए लोगों में न सुरेश कलमाडी हैं, न शीला दीक्षित हैं, न कोई बड़ा ठेकेदार या अफसर है। इससे सिद्ध होता है कि ये लोग ऐसे छोटे-मोटे काम नहीं करते।

अगर गमले चुराने की जांच होगी तो ये सभी लोग निर्दोष सिद्ध होंगे। जो गंभीर प्रकृति के और इज्जतदार चोर हैं वे गमले नहीं, मय गमलों स्टेडियमों को चुराने की कोशिश कर रहे थे। अब अगर आप पूरी इमारत ही चुरा लें तो बिजली के तार या बल्ब, गुसलखाने में रखा साबुन-तौलिया, सूखते हुए कपड़े, जूते-चप्पल अलग से चुराने की कोशिश नहीं करनी पड़ती।

ऐसे लोग गमले और तौलिया-साबुन चुराने जैसी ओछी हरकत करके अपने नाम पर बट्टा नहीं लगाना चाहते थे। गड़बड़ यह हुई कि इनमें से किसी ने कोई खेल नहीं खेला, खेलों का उन्हें कोई अनुभव नहीं है। कलमाडी भारतीय ओलंपिक एसोसिएशन के अध्यक्ष हैं, इससे ही जाहिर है कि उन्हें खेलों के बारे में कुछ अता-पता नहीं है।

मनोहर सिंह गिल इसीलिए खेलमंत्री हैं कि उन्हें खेलों की कोई जानकारी नहीं है। जिसे खेलों की जरा भी जानकारी होगी वह सतपाल पहलवान को धक्का मारने की जुर्रत नहीं करता। लोग भी ऐसे निर्दयी हैं कि हल्ला मचाने लगें कि सतपाल पहलवान का अपमान हुआ, किसी ने गिल से यह नहीं पूछा कि आपकी कोहनी में चोट तो नहीं आई। बहरहाल, चोरी करने वालों को पूरा स्टेडियम चुराने की आदत नहीं थी, न ही खेल के भारी भरकम सामान चुराने की थी। इसीलिए वे पकड़े गए यानी गमले चुराने का काम छोटे-मोटे चोर कर रहे थे, यह बड़े और प्रतिष्ठित लोगों का काम नहीं है।

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