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कोच्चि ने जवाब दिया, बीसीसीआई करेगी अध्ययन

कोच्चि ने जवाब दिया, बीसीसीआई करेगी अध्ययन

कोच्चि आईपीएल फ्रेंचाइजी ने बुधवार को बीसीसीआई के नोटिस का जवाब देते हुए क्रिकेट बोर्ड को पत्र लिखा जो इस टवेंटी20 लीग के चौथे टूर्नामेंट में इस नई टीम के भाग्य का फैसला करेगा। बोर्ड ने नोटिस जारी करके इस टीम को अपनी समस्याएं सुलझाने के लिए दस दिन का समय दिया था।

क्रिकेट बोर्ड की कानूनी टीम को इस पत्र का अध्ययन करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह पत्र बोर्ड अध्यक्ष शशांक मनोहर को भेजा गया है। बीसीसीआई के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी प्रो रत्नाकर शेट्टी ने कहा कि कोच्चि फ्रेंचाइजी को दिए गए नोटिस का जवाब देने का आज आखिरी दिन था। पिछले दो-तीन दिन में उन्होंने कुछ बैठकें की और एक पत्र जमा किया जिसे अध्यक्ष (शशांक मनोहर) के पास भेजा गया है।

फ्रेंचाइजी के पत्र की सामग्री का खुलासा करे बिना शेट्टी ने कहा कि बोर्ड अपने कानूनी विभाग के इस पत्र का अध्ययन करने के बाद ही कोई फैसला करेगा। उन्होंने कहा कि फैसला लेने से पहले अध्यक्ष इसका अध्ययन करेंगे, कानूनी टीम इसका अध्ययन करेगी। उन्होंने साथ ही कहा कि बोर्ड ने फिलहाल आईपीएल संचालन परिषद की बैठक बुलाने के बारे में नहीं सोचा है।

इससे पहले कोच्चि आईपीएल फ्रेंचाइजी के लिए सफल बोली लगाने वाले समूह के विभिन्न साझेदारों ने बैठक करके समझौते पर पहुंचने और इस टी20 लीग की फ्रेंचाइजी का अधिकार रखने के लिए संयुक्त उपक्रम की कंपनी बनाने पर चर्चा की। सूत्रों ने हालांकि बताया कि फ्रेंचाइजी पर नियंत्रण के लिए झगड़ रहे दो गुटों के बीच मतभेद खत्म करने के लिए हुई यह बैठक बेनतीजा रही।

विवाद का सबसे बड़ा मुद्दा यह है कि संयुक्त उपक्रम बनने के बाद क्रिकेट बोर्ड से 33 करोड़ 30 लाख डालर में खरीदी गई फ्रेंचाइजी का कामकाज कौन देखेगा। कारपोरेट फर्म एंकर अर्थ, परिणी डेवलेपर्स, रोसी ब्ल्यू और फिल्म वेव का फ्रेंचाइजी में 75 प्रतिशत हिस्सा है।

सूत्रों ने बताया कि बाकी 25 प्रतिशत हिस्सा शैलेंद्र गायकवाड़, उनके भाई रवि और परिजनों तथा कुछ और लोगों को फ्रेंचाइजी की बोली के दौरान सेवा के लिए फ्री इक्विटी के तौर पर दिया गया है। सूत्रों ने कहा कि बहुमत वाले शेयर धारक चाहते हैं कि अल्पमत वाले निवेशक 10 प्रतिशत निवेश करें और बाकी 15 प्रतिशत (फ्री) इक्विटी के तौर पर लें जबकि अन्य पक्ष चाहते हैं कि या तो उन्हें सीईओ का पद मिले या क्रिकेट मामले उनके पास रहें।

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