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पैगम्बर शिक्षा के आधार पर अयोध्या का समाधान

यदि मुस्लिम समुदाय शुद्ध इस्लाम के आधार पर या पैगम्बर हजरत मोहम्मद साहब की शिक्षा के आधार पर श्रीरामजन्मभूमि विवाद का हल करना चाहें तो समाधान संभव है।

विश्व कल्याण फाउंडेशन ने एक पुस्तिका का प्रकाशन किया है जिसके लेखक संदीप साई कृष्ण हैं। जिसमें उन्होंने कहा है कि रामजन्मभूमि पर बनी बाबरी मस्जिद इस्लाम के आधार (मस्जिदे जिरार) की श्रेणी में आती है। इस्लामी इतिहास में ऐसी कई घटना हुई है जिसमें मस्जिदों को हटाकर दूसरे समुदाय को उसकी जमीन वापस की गई है।

पैगम्बर मोहम्मद साहब ने मस्जिदे जिरार को अपवित्र मानते हुए अपने अनुयायियों को ऐसी मस्जिद से किसी भी तरह का सम्बन्ध नहीं रखने और उसे तोड़ने की हिदायत दी थी जिसका पालन अनुयायियों ने किया। इस्लामी इतिहास की ऐसी ही घटना का जिक्र लेखक अल्लाम युसूफ करजावी व अबू मसऊद अजहर नदवी ने अपनी किताब (इस्लाम मुसलमान और गैर मुस्लिम) में किया है।

किताब के अनुसार उमवी खलीफा वलीद बिन अब्दुल मालिक ने ईसाईयों से यूहन्ना गिरजाघर को मस्जिद में शामिल कर लिया। कुछ साल बाद जब हजरत उमर बिन अब्दुल अजीज खलीफा बनाए गए तब ईसाईयों ने उनसे इस मामले की शिकायत की। खलीफा ने तुरन्त अपने गवर्नर को पत्र लिखा कि मस्जिद का वह हिस्सा ईसाईयों को वापस किया जाय।

पुस्तिका में कहा गया है कि उलेमा और मुस्लिम धर्म विधान के ज्ञाता की राय में कुरान और हदीस के अनुसार किसी कब्जे वाली जमीन पर मस्जिद बनाना जायज नहीं है चाहे वह किसी मुस्लिम समुदाय के लोगों की क्यों नहीं हो। इस्लाम के अनुसार ऐसे निर्माण अवैध निर्माण की श्रेणी में आते हैं।

पुस्तिका में कहा गया है कि रामजन्मभूमि मंदिर विवाद पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ के निर्णय में स्थिति पूरी साफ हो चुकी है कि मस्जिद किसी मंदिर को तोड़ कर बनाई गई। न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल ने लिखा है (विवादित ढांचा किसी खाली जमीन पर नहीं बना) यहां पहले से ही निर्माण था। निर्माता को यह ग्यात था।उसने इसकी दीवारों के इस्तेमाल में संकोच नहीं किया। उसके पत्थरों खंभों और ईटों का उपयोग किया।

पुस्तिका के अनुसार खंडपीठ के न्यायाधीश डी.वी.शर्मा ने अपने निर्णय में लिखा कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने विवादित स्थल पर खुदाई का काम अदालत के आदेश पर किया। एएसआई की रिपोर्ट में प्राचीन मंदिर के सबूत हैं, मंदिर की नींव है उसके खंभे हैं। रिपोर्ट में कहा गया कि यहां एक मंदिर था।

न्यायमूर्ति एस.यू.खान ने भी लिखा कि मस्जिद का निर्माण मंदिर के अवशेषों पर किया गया था। इसकी कुछ सामग्री का इस्तेमाल मस्जिद निर्माण के लिए किया गया। हालांकि इससे यह साबित नहीं होता कि निर्मित हिस्से समेत विवादित परिसर पर बाबर के आदेश पर मस्जिद का निर्माण किया गया।

पुस्तिका के अनुसार खंडपीठ ने फैसले में यह टिप्पणी पुरातात्विक सर्वे आफ इंडिया की ओर से अयोध्या में की गई खुदाई की रिपोर्ट के आधार पर की। खुदाई दो न्यायाधीश की निगरानी में हुई थी। अदालत का आदेश था कि खुदाई में हिन्दू और मुसलमान दोनों समुदाय के कामगार शामिल किए जाएं। इसके अलावा खुदाई के समय दोनों पक्षों के प्रतिनिधि शामिल थे।

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  • Web Title:पैगम्बर शिक्षा के आधार पर अयोध्या का समाधान