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शत्रु संपत्ति संशोधन विधेयक को कैबिनेट की मंजूरी

शत्रु संपत्ति संशोधन विधेयक को कैबिनेट की मंजूरी

केन्द्र सरकार ने शत्रु संपत्ति अधिनियम में संशोधनों को बुधवार को मंजूरी दे दी। अन्य बातों के अलावा इसमें निहित है कि ऐसी संपत्ति केवल उसके स्वामियों या उसके वैध उत्तराधिकारियों को ही दी जा सकेगी और केन्द्र द्वारा वापस दिए जाने तक वह संरक्षक के पास ही रहेगी।

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में 1968 के संबंधित अधिनियम में संशोधन करने के गृह मंत्रालय के उक्त प्रस्ताव को स्वीकार किया गया। संसद के मानसून सत्र में इस अधिनियम में संशोधन करने का प्रयास किया गया था, लेकिन कई मंत्रियों सहित विभिन्न दलों के मुस्लिम सांसदों ने आग्रह किया कि पाकिस्तान चले गए लोगों की संपत्ति पर यहां रह रहे उनके वैध उत्तराधिकारियों को मालिकाना हक दिया जाए।

इससे पहले 1968 में एक कानून के तहत सरकार ने घोषणा की थी कि विभाजन के समय जो लोग पाकिस्तान चले गए उनकी संपत्ति को शत्रु संपत्ति माना जाएगा।
 प्रस्तावित संशोधनों में प्रावधान किया गया है कि शत्रु संपत्ति उस समय तक संरक्षक के अधिकार क्षेत्र में रहेगी जब तक कि केन्द्र सरकार इसे वापस नहीं देती और शुत्र संपत्ति केवल उसके वैध स्वामी या उसके वैध उत्तराधिकारी को ही वापस दी जा सकती है।

एक अन्य प्रस्तावित संशोधन में प्रावधान है कि सक्षम प्राधिकार की मंजूरी के बिना जुबानी वसीयत या जुबानी उपहार के रूप में किसी भी शत्रु संपत्ति का हस्तांतरण नहीं हो सकेगा। यह भी कि कोई भी अदालत शत्रु संपत्ति की वापसी के लिए संरक्षक या केन्द्र सरकार को निर्देश नहीं दे सकती है।

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