अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

यूजीसी नेट -2010: पूरा करें लेक्चररशिप का सपना

यूजीसी नेट -2010: पूरा करें लेक्चररशिप का सपना

जेआरएफ अथवा लेक्चरर बनने का सपना तभी संभव हो पाता है, जब यूजीसी द्वारा आयोजित परीक्षा नेट को क्लीयर किया जाए। साल में दो बार आयोजित होने वाली इस परीक्षा में लाखों छात्र सम्मिलित होते हैं, जबकि सीटें सीमित हैं। इसके चलते प्रतिस्पर्धा का माहौल बन जाता है। देश के लगभग 70 केंद्रों तथा 77 विषयों के लिए आयोजित की जाने वाली इस परीक्षा का रजिस्ट्रेशन शुरू हो चुका है। यूजीसी के नए निर्देश के अनुसार इस वर्ष से इसमें आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह से ऑनलाइन हो चुकी है। इस साल जारी नोटिफिकेशन के अनुसार परीक्षा 26 दिसंबर, 2010 को आयोजित की जाएगी। परीक्षा का माध्यम हिन्दी तथा अंग्रेजी दोनों होंगे।

एजुकेशनल क्वालिफिकेशन

इसमें आवेदन के लिए छात्र को किसी मान्यताप्राप्त विविँ से 55 फीसदी अंकों सहित मास्टर डिग्री अथवा उसके समकक्ष परीक्षा उत्तीर्ण होनी आवश्यक है। वे छात्र भी आवेदन कर सकते हैं, जो इस वर्ष की स्नातकोत्तर परीक्षा में सम्मिलित हो रहे हों या जिनका रिजल्ट आना शेष है। एससी/एसटी छात्रों को 5 फीसदी की छूट दी जाएगी।

आयु सीमा

परीक्षा में वही छात्र बैठ सकते हैं, जिन्होंने 28 वर्ष की आयु पूरी कर ली हो। एससी, एसटी, ओबीसी एवं अन्य आरक्षित श्रेणी के छात्रों को 5 वर्ष की छूट है। रिसर्च का अनुभव वाले छात्रों को भी आयु सीमा में छूट प्राप्त है। लेक्चरर के लिए आयु का कोई बंधन नहीं है।

परीक्षा रणनीति

इस परीक्षा में कुल तीन प्रश्नपत्र होते हैं, जो एक ही दिन आयोजित किए जाते हैं। प्रश्नों का स्वरूप यूजीसी द्वारा उपलब्ध कराए गए सिलेबस पर केंद्रित रहता है। इसके प्रमुख चरण निम्न हैं-

प्रथम प्रश्नपत्र- प्रथम प्रश्नपत्र सामान्य प्रश्नों पर आधारित होता है, जो कि ऑब्जेक्टिव फॉर्म में होते हैं। इस खण्ड के प्रश्न मुख्य रूप से छात्रों की बौद्धिक क्षमता एवं सामाजिक अनुप्रयोग पर आधारित होते हैं। इसमें कुल 60 प्रश्न दिए जाते हैं, जिनमें से छात्रों को केवल 50 प्रश्न हल करने होते हैं। कुल 100 अंक तथा सवा घंटे के इस प्रश्नपत्र में प्रश्न न्यूमेरिकल एबिलिटी, कम्प्यूटर, टीचिंग एबिलिटी, रीजनिंग, रीडिंग कॉम्प्रिहेंशन, रिसर्च एप्टीटय़ूड, हायर एजुकेशन सिस्टम तथा आईटी पर आते हैं। हालांकि इसके अंक मेरिट में नहीं जुड़ते, फिर भी इसे उत्तीर्ण करना आवश्यक है।

द्वितीय प्रश्नपत्र- यह खण्ड चुने हुए विषयों पर आधारित होता है। इसमें पूछे जाने वाले प्रश्नों की संख्या 50, अंक 100 तथा समय सवा घंटे का होता है। इसमें खास बात यही होती है कि इसके अंक मेरिट में जोड़े जाते हैं।

तृतीय प्रश्नपत्र- इस प्रश्नपत्र की रूपरेखा जून 2010 की नेट परीक्षा से ही बदल गई है। नई संरचना के अनुसार इसमें कुल 19 प्रश्न पूछे जाएंगे तथा इसके कुल 200 अंक निर्धारित किये गए हैं। परीक्षा की अवधि ढाई घंटे है। यह परीक्षा चार सेक्शनों में बंटी हुई है तथा इसमें छात्रों को कुल 2500 शब्द लिखने पड़ते हैं।

तैयारी की रणनीति

यह परीक्षा क्वालिफाइंग नेचर के साथ-साथ हाईस्कोरिंग भी है। अत: इसमें बेहतर तैयारी से ही सफलता हासिल हो सकती है। कुछ प्रमुख सूत्र निम्न हैं-

परीक्षा में पर्याप्त समय शेष है, अत: पूरे सिलेबस का इत्मीनान से अध्ययन शुरू करें। कोशिश करें कि हर टॉपिक टच में आ जाए।

तैयारी को सिलेबस एवं तैयारी के हिसाब से बांट लें तथा इसी को आधार बनाकर अध्ययन करें। सभी विषयों को बराबर महत्त्व दें।

उत्तर देने के तरीकों को प्रभावी बनाएं तथा यह न भूलें कि आपको औरों से कहीं ज्यादा बेहतर करना है।

उत्तर देते समय उसमें महत्त्वपूर्ण बिन्दुओं को अंडरलाइन कर दें।

प्रथम एवं द्वितीय प्रश्नपत्र से निगेटिव मार्किंग खत्म हो गई है, इसलिए छात्र कोशिश करें कि कोई प्रश्न छूटने न पाए।

तैयारी को लेकर हतोत्साहित न हों, परीक्षा साल भर में दो बार आयोजित होती है। दिसंबर न सही, जून में भी मौका मिलेगा।
ऑनलाइन आवेदन एवं सिलेबस के लिए यूजीसी की वेबसाइट www.ugc.ac.in विजिट करें।

आनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि
25 अक्तूबर, 2010
प्रवेश परीक्षा की तिथि
26 दिसंबर, 2010

तृतीय प्रश्न प्रश्न की संरचना
सेक्शन प्रश्नों की संख्या  कुल शब्द-सीमा  कुल अंक
एस्से      2 500 गुणा 2=1000    40
एनालिटिकल       3 300 गुणा 3=900      45
शॉर्ट आंसर      9 50 गुणा 9=450    90
टेक्स्ट बेस्ड      5 30 गुणा 5=150    25
कुल    19 2500     200

परीक्षा : एक नजर
प्रश्नपत्र कुल अंक कुल प्रश्न अवधि समय-विभाजन 
प्रथम 100 50 सवा घंटे  9.30-10.45
द्वितीय 100 50 सवा घंटे 10.45-12.00
तृतीय 200 19 ढाई घंटे 1.30-4.00 

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:यूजीसी नेट -2010: पूरा करें लेक्चररशिप का सपना