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बड़े बेआबरू होकर..

कॉमनवेल्थ खेलों के शुभंकर शेरा को विदाउट प्ले ही मैदान से आउट कर दिया गया। कहावत है कि नगाड़ों में तूती की आवाज दब जाती है। यही हाल शेरा का हुआ। वैसे भी जब भारत देश में असली शेर ही गायब हो रहे हैं तो कॉमनवेल्थ खेलों से शेरा गायब होना कोई आश्चर्य नहीं है। जब खेलों के सितारे गर्दिश में थे तब शेरा को जगह-जगह घुमा-घुमाकर प्रचार किया जा रहा था। अब जब गाड़ी पटरी पर आ गई तो ‘मतलब निकल गया तो पहचानते नहीं’। चूक कहां हुई, तालमेल में या गलतफहमी में।
राजेंद्र कुमार सिंह, आर्य अपार्टमेंट, सेक्टर-15, रोहिणी, दिल्ली

भद्दा मजाक
संसद की कैंटीन को लगभग पांच करोड़ रुपए की सब्सिडी प्रतिवर्ष केन्द्र सरकार देती है। इसका आशय सांसदों को उत्तम क्वालिटी का नाश्ता, भोजन कम दरों पर उपलब्ध कराना है। कैंटीन में एक थाली, जिसमें सभी आवश्यक पोषक तत्वों वाली खुराक होती है, 12.50 रुपए में मिलती है, जिसका बाजार मूल्य 250 रुपए के आसपास है। अब सुना है कि थाली का मूल्य बढ़ाकर 16 से 20 रुपए किया जा रहा है। कुछ सांसदों के विरोध करने पर थाली का मूल्य 16 रुपए शायद मान लिया गया है। मूल्यवृद्धि के कारण सांसदों का वेतन सोलह गुना बढ़ाया जाना बताया जा रहा है। यह एक भद्दा मजाक नहीं तो और क्या है?
जसवंत सिंह, शांतिकुंज, नई दिल्ली

प्राचीन परंपरा
मेहमानों का आदर करना भारत की प्राचीन परम्परा रही है। हर भाषा में अपना-अपना रंग है, हर भाषा में अपना-अपना संगीत है। आजकल अमेरिका के राष्ट्रपति ओबामा भारत आने को उत्सुक हैं। यह एक अच्छी बात है, वह भारत से दोस्ती का हाथ बढ़ाना चाहते हैं। उनका भारत के लिए प्रति अटूट श्रद्धा, विश्वास का दिलोजान से आदर करना चाहिए। भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह व अमेरिका के राष्ट्रपति ओबामा दोनों ही उच्च विचारों के व दूरदर्शी हैं। सभी देशों में आपस में इस तरह चलता रहे तो बातचीत द्वारा अनेक जटिल से जटिल समस्याओं का समाधान भी हो सकता है।
श्याम सुन्दर, 1814, संजय बस्ती, तिमारपुर, दिल्ली

ऐंठन कायम है
एक समाचार के अनुसार रुचिका गिरहोत्र मामले में दोषी कुख्यात पूर्व पुलिस महानिदेशक एसपीएस राठौड़ अभी तक 18 महीने की सजा नहीं भुगत पाए हैं, लेकिन उन्होंने जेल से छूटने की तिगड़म लगाते हुए वकील के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाई है कि वे निर्दोष हैं। बड़ा अफसोस व ताज्जुब है कि एक आईपीएस अधिकारी दूसरे अपराधियों की तरह खुद को निदरेष साबित करने की जुगत में बेशर्मी से भिड़ा है। माननीय सुप्रीम कोर्ट ने ठीक ही कहा है कि राठौड़ को यह ध्यान रखना चाहिए कि उसके खिलाफ एक नहीं, तीन निचली अदालतों ने प्रतिकूल टिप्पणियां की हैं।
बीएस डोगरा, सीमापुरी, दिल्ली

मीडिया में धीरज
‘कहां से आया खबरिया चैनलों में इतना धीरज’ पढ़ा। इस लेख में बिल्कुल सही कहा गया है कि इस बार सामाजिक, धार्मिक संगठनों ने अपनी मर्यादा नहीं तोड़ी और अयोध्या के फैसले को सहज भाव से अपनाया है। शायद भारतीय समाज और प्रजातंत्र परिपक्व हो रहा है और इसी के साथ मीडिया को भी परिपक्व होना ही होगा। वैसे यह बात काबिले तारीफ है कि इस बार मीडिया चैनलों ने धीरज के साथ काम लिया। हालांकि मीडिया का यह विचार कि अयोध्या का फैसला आने के पहले कोई भी परिचर्चा स्टूडियो में डिस्कशन नहीं होगी। फैसला आने के बाद परिचर्चा इसलिए होगी ताकि जनता को फैसले आने के बाद फैसले की पूरी तस्वीर दी जा सके और शरारती तत्वों को अफवाह फैलाने का कोई मौका न मिल सके। ये बातें सटीक हैं क्योंकि अफवाह फैलाने से हमारे देश में अशांति उत्पन्न हो जाती थी, लेकिन मीडिया के इस कदम से वाकई आज शांति कायम है। मीडिया की भूमिका को भूलना गलत होगा।
पूजा, जामिया मिल्लिया इस्लामिया

राजनीति का बोलबाला
समय का पहिया इतनी तीव्र गति से चल रहा है कि राजनीति की दलदल में सभी फंसते ही जा रहे हैं। समय की करवट के साथ-साथ अब मानव भी करवट बदलता जा रहा है। कांग्रेस सरकार तथा भाजपा सरकार के साथ-साथ आज आम जनता भी राजनीति खेलती है। आज के दौर में राजनीति इस प्रकार फैलती जा रही है कि इस दलदल में हर मानव फंसता ही जा रहा है। पूंजी और राजनीति का खेल विकसित देशों के साथ-साथ विकासशील देश भी खेल रहे हैं। अगर कोई गरीब अपनी आवाज को उठाता है तो उसकी आवाज को दबाने के लिए हर प्रकार के हथकंडों का प्रयोग किया जाता है। उच्च शिक्षा ग्रहण करने के लिए पूंजी की आवश्यकता होती है, जो ज्यादातर पूंजीपतियों के पास होती है। वह घूसखोरी, रिश्वत के बलबूते से आगे बढ़ जाते हैं। निर्धन वर्ग के पास पूंजी न होने के कारण वह उच्चशिक्षा ग्रहण नहीं कर पाते। क्या इसका कोई उपचार नहीं?
अनिता सिंह, खोड़ा कॉलोनी, गाजियाबाद

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