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यदि उत्तर कोरिया का पतन हुआ तो!

वित्तीय संकट का सबसे खास सबक यह है कि हमें ‘ब्लैक स्वान्स’ के बारे में सावधान रहना चाहिए। यह नासिम निकोलस तालिब का अनिश्चितता का ऐसा सिद्धांत है, जो कहता है कि हम गणना, आंकलन और विश्लेषण के आधार पर इतिहास की घटनाओं की भविष्यवाणी नहीं कर सकते। तालिब के मुताबिक, यह ऐसी घटनाएं हैं, जिनके होने की संभावना कम होती है, लेकिन जब होती हैं तो बड़ी तबाही मचा सकती हैं।

भू-राजनीति में एक ऐसी ही संभावित घटना है जिसके बारे में सोचना हम सबके लिए चुनौती है और वह है -उत्तर कोरिया का पतन। अमेरिका का सारा ध्यान उत्तर कोरिया के छोटे से परमाणु भंडार पर लगा है, लेकिन ज्यादा संभावित और संभवत: एक परिदृश्य जो ज्यादा खतरनाक है, वह है वहां के शासन का पूरी तरह से धराशायी होना।

उत्तर कोरिया में वार्ता करने गए अमेरिकी दल के प्रमुख और वरिष्ठ राजनयिक क्रिस्टोफर हिल ने मुझसे पिछले हफ्ते सियोल में कहा कि उत्तर कोरिया की मौजूदा स्थिति मध्ययुगीन यूरोप जैसी लगती है। एक बूढ़ा राजा जिसके पास पूरी ताकत तो है, पर वह विचित्र तरीके से शासन करता है। आखिरकार वह अपने सबसे छोटे बेटे को उत्तराधिकारी नियुक्त करता है। इस सत्ताइस वर्षीय उत्तराधिकारी के पास शास्त्र और सरकार का कोई अनुभव नहीं है, इसलिए उसके पिता एक सहायक नियुक्त करते हैं। यह सहायक उसका बहनोई है। सत्ता पर परिवार की पकड़ और मजबूत करने के लिए राजा ने उसकी बहन को भी सेना में ऊंचा ओहदा दे दिया है।

आज का उत्तर कोरिया यही है। देश के ‘प्रिय नेता’ किम जोंग-2  ने आखिरकार बेटे किम-जोंग-उन को अपना उत्तराधिकारी नियुक्त कर दिया और उनकी बहन व बहनोई को नई शक्तियां दे दीं। शेक्सपीयर का यह नाटक रोचक हो सकता है, अगर इससे दिक्कत न खड़ी हो। हिल कहते हैं, ‘लगता है यह उत्तराधिकार योजना एक ऐसे हालात को स्थिर करने के लिए बनाई गई है, जो वास्तव में स्थिर नहीं है।’

उत्तर कोरिया में अस्थिरता के कई लक्षण दिखाई दे रहे हैं। आर्थिक तौर पर उसका साल खराब रहा है। उसकी मुद्रा का विनाशकारी पुनमरूल्यांकन किया गया है। वहां खाद्य की कमी और अकाल अभी भी व्याप्त हैं। संभवत: उत्तराधिकार से पैदा हुए भीतरी राजनीतिक तनावों के चलते पिछले मार्च में दक्षिण कोरिया का नौसैनिक जहाज शियोनान डुबो दिया गया।

संभवत: सबसे जाहिर बात यह है कि उत्तर कोरिया के लोग बाहरी दुनिया के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानने लगे हैं। इस समय देश में दो लाख मोबाइल ग्राहक हैं और ब्लैक मार्केट में डीवीडी धड़ल्ले से बिक रही है। अगर उत्तर कोरिया वालों को दक्षिण कोरिया के आधुनिक, संपन्न और लोकतांत्रिक समाज की झलक मिल गई, तो वहां निश्चित तौर पर सामाजिक असंतोष उत्पन्न होगा और उससे ज्यादा भी कुछ हो सकता है।  उत्तर कोरिया की प्रति व्यक्ति जीडीपी 1900 डॉलर और दक्षिण कोरिया की 28100 डॉलर है।

रोजगार, धन, अवसर और आजादी के मामले में उत्तर कोरिया दक्षिण की तरफ बढ़ने जा रहा है। इस मौके पर अगर दक्षिण कोरिया, चीन और अमेरिका ने विधिवत योजना नहीं बनाई तो बहुत कुछ उथल-पुथल हो जाएगा। दक्षिण कोरिया इस समस्या के बारे में सोचना नहीं चाहता। इस बारे में जब मैंने दक्षिण कोरिया के राजनेताओं से सवाल किया तो उनकी प्रतिक्रिया हताश हंसी, जल्दबाजी के जवाब और विषय बदलने के तौर पर मिली। पिछले महीने राष्ट्रपति ली- मायंग- बाक ने बुद्धिमानीपूर्ण तरीके से अपरिहार्य की आशंका से निपटने के लिए एकीकरण टैक्स की बात उठाई, लेकिन जनता इस संभावना के सख्त खिलाफ थी और मुद्दा खत्म हो गया।

यह बात समझी जा सकती है। कोरिया के लोगों को इस तरह का दुनिया का आखिरी प्रयोग याद है। जर्मनी के एकीकरण के दस साल बाद भी दोनों हिस्सों में इतिहास के जख्मों के गहरे निशान और तनाव बाकी हैं। जर्मनी के जीडीपी का पांच प्रतिशत पिछले दस सालों में एकीकरण पर खर्च किया गया है। कोरिया का मामला उससे भी ज्यादा नाटकीय है। उत्तर कोरिया, पूर्वी जर्मनी के मुकाबले ज्यादा बड़ा और ज्यादा गरीब है।

चीन ने उत्तर कोरिया पर ज्यादा दबाव डालने का प्रतिरोध किया है। उसकी एक वजह तो वहां के शासन से अपनी एकजुटता दिखाने की है और दूसरी वजह वहां के शासन के पतन का डर भी है। अगर वहां के शासन का पतन होता है, तो शरणार्थी महज दक्षिण कोरिया की तरफ ही नहीं भागेंगे, बल्कि वे उत्तर की ओर चीन में भी घुसेंगे।

अमेरिका अक्सर उत्तर कोरिया के परमाणु भंडार के बारे में भी सोचता रहा है, लेकिन इस समस्या के हल के लिए उसे चीन से इस विषय पर भी चर्चा करनी होगी कि अगर वहां के शासन का पतन होता है तो आगे का रास्ता क्या होगा। वहां बड़े गंभीर मसले दांव पर लगे हैं। क्या एकीकृत कोरिया अमेरिका से अपना नजदीकी रिश्ता कायम रख सकेगा? क्या वह उत्तर कोरिया का एटमी हथियार बरकरार रख पाएगा? क्या अमेरिकी फौजें देश में रहेंगी?

अगर इन सारे सवालों का जवाब ‘हां’ में है, तो एकीकृत कोरिया अमेरिका का दोस्त होगा और अमेरिकी फौजें व एटमी हथियार चीन की सीमा पर तैनात होंगे। इस हकीकत पर चीन की क्या प्रतिक्रिया होगी? क्या वह उत्तर कोरिया के शासन को बचाने के लिए वहां अपनी फौजें भेजेगा? उसके बाद दक्षिण कोरिया और अमेरिका की फौजें क्या करेंगी?

जब उत्तर कोरिया का पतन होगा तो कोरियाई प्रायद्वीप में होने वाली उथल-पुथल की सहज कल्पना की जा सकती है। उससे चीन और अमेरिका की  तरफ से प्रतिद्वंद्वी और शत्रुतापूर्ण प्रतिक्रियाएं होंगी। युवान के मूल्य पर होने वाले हल्के-फुल्के विवाद को भूल जाइए। उत्तर कोरिया का पतन एक गंभीर भूराजनीतिक अस्थिरता पैदा कर सकता है। इसलिए यह जरूरी है कि अमेरिका, चीन और दक्षिण कोरिया ‘ब्लैक स्वान्स’ यानी इतिहास की अनिश्चितता के बारे में बातें करना शुरू कर दें।

फरीद जकरिया टाइम मैगजीन के एडीटर एट लार्ज और द पोस्ट अमेरिकन वर्ल्ड के लेखक हैं

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