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29 कामगारों ने की 274 करोड़ की बचत

बोकारो स्टील प्लांट के 29 कामगारों ने नई सोच व मेहनत की बदौलत नई खोज कर प्लांट की 274 करोड़ रुपए की बचत की। कामगारों की इस खोज से संस्थान को समय की भी बचत हुई। बोकारो स्टील को नई खोज के सहारे बचत दिलानेवाले कामगारों का मानना है कि यदि इच्छाशक्ति हो, तो कोई काम मुश्किल नहीं है।

इसके साथ ही काम व संस्थान के प्रति समर्पण भी जरूरी है। मंगलवार को प्रतिष्ठित विश्वकर्मा अवार्ड से सम्मानित बोकारो इस्पात के सीआरएम व हॉट स्ट्रीप मिल टीम के सदस्यों ने खोज के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। सीआरएम में तेल के रिसाव व अधिक खपत ने कामगारों को खोज के लिए प्रेरित किया।

एसए खान, एसके पांडेय, पीएनपी सिंह, एसएल यादव, एस मांझी व पी मांझी के टीम ने वायलिंग सिस्टम में मोडिफिकेशन किया। इससे इकाई को 8.9 करोड़ की बचत हुई। प्रतिदिन खर्च होनेवाले 6 ड्रम तेल की मात्र घट कर 2 ड्रम पर आ गयी। सदस्यों ने एक स्वर में कहा कि काम के प्रति समर्पण जरूरी है।

समर्पण से बड़ी से बड़ी कठिनाई को आसानी से दूर किया जाता है। हॉर्ट स्ट्रीप मिल की 3 सदस्यीय टीम जिसमें विमलेश कुमार, अनिल कुमार वर्मा तथा तलिब अंसारी शामिल थे, ने स्केल रिमोभल सिस्टम में सुधार कर 33.26 करोड़ रुपए की बचत की।

टीम के सदस्यों ने कहा कि फर्नेस महीना दो महीना में ब्रेक डाउन हो जाता था। स्लेब गिर जाता था। इसके कारण आर्थिक नुकसान के साथ समय की बर्बादी होती थी। टीम के सदस्यों ने बोकारो इस्पात के बेकार पड़े सामान का उपयोग कर 1 लाख खर्च से नया स्लेब विकसित किया। इसके सहारे बर्बादी को रोका गया। ब्रेक डाउन भी नहीं के बराबर हो रहा है।

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