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पार्ट टाइम एमबीए से चढें सफलता की सीढ़ियां

कॉर्पोरेट क्षेत्र में एमबीए की डिग्री प्राप्त करना सफलता का पर्याय माना जाता है। इसीलिए विभिन्न नौकरीपेशा एग्जीक्युटिव भी एमबीए कर रहे हैं, जिस कारण संस्थानों में सीटें कम पड़ रही हैं। इसे देखते हुए पार्टटाइम एमबीए कराने की सुविधा सामने आई हैं, जिससे जुड़े कुछ शुरुआती सवाल भी हैं। आज जानिए एग्जीक्युटिव एमबीए कोर्स से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी।

एमबीए की डिग्री का क्रेज करियर निर्माण की दृष्टि से युवाओं के लिए लंबे अरसे से विशेष आकर्षण का केंद्र रहा है। सफलता की सीढ़ियां चढ़ने में इस डिग्री की महती भूमिका से इनकार नहीं किया जा सकता। इंजीनियर और डॉक्टरों की बड़ी संख्या को भी इस प्रकार की मैनेजमेंट डिग्रियां पाने की होड़ में देखा जा सकता है।

जनमानस में यह प्रबल धारणा है कि कॉर्पोरेट मैनेजमेंट कैटर में शामिल होने के लिए शॉर्टकट एमबीए की डिग्री के माध्यम से ही संभव है। शायद यही कारण है कि विविध प्रोफेशन में लंबे अरसे तक कार्य करने के बावजूद रेग्यूलर, कॉरस्पॉन्डेंस अथवा पार्टटाइम एमबीए करने वालों की संख्या में बढ़ोतरी देखी जा सकती है।

इस मांग को पूरा करने में सरकारी विश्वविद्यालय एवं प्रबंधन कॉलेजों की सीमित एमबीए सीटें अत्यंत अपर्याप्त हैं, जिसके कारण भारी संख्या में प्राइवेट मैनेजमेंट संस्थान अस्तित्व में आ गए हैं। ये संस्थान प्राय: पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन मैनेजमेंट कोर्सो में ही आयोजित करते हैं जिनका महत्व एमबीए की तुलना में निश्चित तौर पर अभी कम है। हालांकि आईआईएम के पीजी डिप्लोमा को इन मैनेजमेंट की डिग्रियों को अपवाद के रूप में देखा जा सकता है।

इतना ही नहीं, इन कोर्सेज से फीस भी आम छात्रों के लिहाज से कहीं ज्यादा होती है। इन्हीं सब परिस्थितियों का नतीजा है कि पार्ट टाइम एमबीए कोर्सेज के प्रति बढ़ते रुझान की स्थितियां तेजी से बढ़ रही हैं। देखा जाए तो रेगुलर एमबीए की अपेक्षा इस प्रकार कोर्स करने के कई फायदे गिनाए जा सकते हैं।

पार्ट टाइम एमबीए के फायदे
-इन कोर्सेज की क्लासेज प्राय: देर शाम या वीक एंड में संचालित की जाती हैं, जिसके कारण नौकरीशुदा लोगों को ज्यादा दिक्कत का सामना नहीं करना पड़ता।
-बिना नौकरी छोड़े हुए एमबीए की डिग्री पाने के अलावा नए उत्तर एवं ज्ञानाजर्न आसानी से संभव हो पाता है।
-अपने कार्यानुभवों के दौरान ही व्यावसायिक समस्याओं का समाधान इन क्लासेस में प्राप्त किया जा सकता है।
-जॉब्स के रहने के कारण वित्तीय समस्याओं से जूझना नहीं पड़ता।
-इस कोर्स की अवधि तीन वर्ष होने के कारण पाठ्यक्रम की भारी-भरकम फीस का बोझ अपेक्षाकृत आसानी से खत्म किया जा सकता है।
-अच्छी कंपनियों एवं कार्पोरेट घरानों द्वारा इन्हें फीस सहित स्पांसर्ड करने के अवसर भी मिल सकते हैं।
-वीक एंड क्लासेज को भी सरलतापूर्वक मैनेज कर पाना मुश्किल नहीं होता।

हालांकि इस प्रकार की डिग्रियों के दूसरे पहलुओं पर गौर करें तो कई नुकसान भी दिखाई पड़ते हैं, लेकिन भावी जीवन में इसके लाभ ही ज्यादा गिनाए जा सकते हैं। नुकसान की दृष्टि से इस कोर्स का लंबी अवधि का होना (3 से 5 वर्ष); अत्यंत सीमित संख्या में पार्ट टाइम एमबीए कोर्सेज संचालित करने वाले संस्थान; नौकरी के साथ कोर्स करने के दौरान दबाव एवं तनावपूर्ण स्थितियों से गुजरना; नौकरी बाजार में पूर्णकालिक एमबीए कोर्सेज की तुलना में पार्ट टाइम एमबीए को कम महत्व दिया जाना; कैम्पस प्लेसमेंट में इन डिग्रीधारकों को शामिल होने की अनुमति नहीं मिलना आदि कारणों को गिनाया जा सकता है।

ग्रेजुएशन की डिग्री के बूते करियर निर्माण करने वाले युवाओं के लिए अपने अन्य प्रोफेशनल डिग्रीधारक सहकर्मियों से आगे बढ़ने और अन्य कंपनियों में कार्यानुभव एवं इस पार्ट टाइम डिग्री की बदौलत बेहतर रोजगार मिलने के अवसरों में कई गुना वृद्धि हो जाती है। इस तथ्य को किसी भी सूरत में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। कम उम्र में रोजगार या स्वरोजगार को अपनाने वाले लोगों के लिए आधुनिक प्रबंधन की विधियों को सीखने के अलावा आत्मविश्वास जगाने की दृष्टि से भी ऐसे कोर्सेज का विशेष महत्व है।

वैसे यहां पर यह जानकारी देना भी प्रासंगिक होगा कि एमबीए कोर्स का संचालन कॉरेस्पोंडेंस कोर्स के रूप में, ऑनलाइन कोर्स के तौर पर तथा एग्जीक्यूटिव एमबीए डिग्री के रूप में देश-विदेश के विश्वविद्यालयों/प्राइवेट संस्थानों द्वारा किया जाता है। इनमें नियमित कक्षाओं की अनिवार्यता न होने तथा छात्रों में परस्पर मेल-मिलाप न होने के कारण ज्ञानाजर्न एवं करियर निर्माण के दृष्टिकोण से इनका ज्यादा महत्व नहीं है। हां, एग्जीक्यूटिव एमबीए में क्लासेज आयोजित होती हैं पर इनकी अवधि प्राय: छह माह से लेकर एक वर्ष तक ही होती हैं, जिसके कारण पढ़ाई का बोझ ज्यादा होता है।

इसके अलावा, मोटी फीस का चक्कर अलग से होता है। इसमें मिडिल स्तर के मैनेजमेंट कर्मियों को एडमिशन देने का प्रावधान है। इन्हें तरक्की मिलने में इस प्रकार की डिग्रियों के जरिये आसानी हो जाती है। हालांकि मेहनती और वाकई सीखने में दिलचस्पी रखने वालों के लिए सामान्य प्रशासन, व्यावहारिक समस्याओं से संबंधित कारगर उपायों तथा टकराव की स्थितियों को सुलझाने संबंधित गुर सीखने के मौके अत्यंत अनुभवी एवं अन्य छात्रों से अवश्य मिलते हैं।

पार्ट टाइम एमबीए प्रोग्राम में दाखिला पाने के लिए कम-से-कम 45 प्रतिशत अंकों सहित ग्रेजुएशन की डिग्री तथा इसके साथ तीन वर्ष या अधिक समय का किसी प्रतिष्ठित कमर्शियल/इंडस्ट्रियल/सरकारी संस्थान में एग्जीक्यूटिव या एडमिनिस्ट्रेटिव कार्य का अनुभव होना भी आवश्यक है। हां, पोस्ट ग्रेजुएट डिग्री में 55% से ज्यादा अंक वाले आवेदकों के लिए ग्रेजुएशन स्तर पर न्यूनतम 45% अंकों की शर्त में छूट का भी प्रावधान है। आवेदन पत्र के साथ इनके वर्तमान एम्प्लॉयर का स्पांशरशिप या लैटर का भी होना अहम पात्रता शर्त है। जरूरी नहीं कि एम्प्लॉयर इस कोर्स की फीस देने की जिम्मेदारी ले।

दाखिले लिखित चयन परीक्षा और जीडी/साक्षात्कार के आधार पर दिए जाते हैं। अमूमन दो घंटे की अवधि की ऑब्जेक्टिव टाइप लिखित परीक्षा में क्वांटिटेटिव एबिलिटी, वर्बल एबिलिटी, इंग्लिश एवं एनालिटिकल एबिलिटी पर आधारित पेपर होते हैं। इसका स्वरूप काफी हद तक कैट परीक्षा से मिलता-जुलता है। इस परीक्षा की मेरिट के आधार पर ही शीर्ष आंकड़ों को ग्रुप डिस्कशन और बाद में इंटरव्यू के लिए बुलाया जाता है।

प्रोफेशनल कार्य अनुभव के साथ किसी प्रतिष्ठित प्रीस्कूल भी इस प्रकार की पार्ट टाइम एमबीए की डिग्री करियर को ऊंचाइयों तक पहुंचाने में अत्यंत सार्थक एवं प्रभावी सिद्ध हो सकती है। बस जरूरत है अन्य पारिवारिक, सामाजिक एवं नौकरी की जिम्मेदारियों के साथ पूर्ण आत्मविश्वास सहेजते हुए इस प्रकार की डिग्री हासिल करने के बीड़े को उठाने की।

पार्ट टाइम एमबीए कराने वाले प्रमुख संस्थान
-फैकल्टी ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज, दिल्ली यूनिवर्सिटी
-गुरु गोविन्द सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी, दिल्ली
-इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ फॉरेन ट्रेंड, दिल्ली
-इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (अहमदाबाद, कोलकाता, लखनऊ, बेंगलुरु)
-इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल वेलफेयर एण्ड बिजनेस मैनेजमेंट, कोलकाता
-निरमा इंडियन इंस्टिट्यूट मैनेजमेंट, अहमदाबाद
-ए.एन. मिश्र कॉलेज ऑफ बिजनेस मैनेजमेंट, पटना

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