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कार्यस्थल पर सीडब्ल्यूजी के पांच सबक

शीला दीक्षित, सुरेश कलमाड़ी से लेकर देश में कॉमनवेल्थ का महाआयोजन कराने में शामिल सभी लोगों की काफी आलोचनाएं की जा रही थीं। मीडिया से लेकर जनमानस सभी में आयोजन की सफलता के संबंध में आशंकाएं व्यक्त की जा रही थीं। सभी को इस बात में संदेह था कि क्या आयोजन से पूर्व सभी कार्य पूरे हो पाएंगे? पर कार्यक्रम के सफल उद्घाटन ने लोगों में आयोजन की कामयाबी की आशा उत्पन्न की। अंतत: कामयाबी मिली भी।

दरअसल, तैयारी के प्रारंभिक दिनों में लापरवाही और विलंब ने नकारात्मक माहौल को जन्म दिया। पर अंतिम परिणाम की जा रही अपेक्षाओं से बहुत आगे साबित हुआ। यहां तक कि अंतरराष्ट्रीय मीडिया के लिए यह नतीजे चौकाने वाले साबित हुए। अत: यहां कुछ ऐसे ही सबक दिए जा रहे हैं जो कि सीडब्ल्यूजी के महाआयोजन से सीखे जा सकते हैं और जिन्हें हम कार्यस्थल पर अपनी कामयाबी के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं।

सोचते हैं तो कर लेंगे: यह हमेशा काफी मायने रखता है कि आप क्या करना चाहते हैं? हर जगह सूचना और जानकारी का संसार है, ऐसे में जो अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित होते हैं, वो ही बदलाव लाते हैं। नकारात्मक सोच व आलोचना को अपने ऊपर हावी न होने दें। यदि आपको किसी चीज की कम जानकारी है, तो आप उसमें विशेषज्ञता हासिल करने के लिए अतिरिक्त प्रयास कर सकते हैं। अपने प्रयासों से आप यह साबित कर लेंगे कि आप काम कर सकते हैं, आप काम करने में सक्षम हैं।

उत्साह वायरल है : किसी भीड़ को माहौल को चीयर करने के लिए दूसरी भीड़ की जरूरत नहीं पड़ती। एक उत्साही और जोशीला व्यक्ति पूरे समूह में सकारात्मक सोच और आशावाद का संचार कर देता है। अत: अपने उत्साह और जोश को ऊंचा उठाने रखने की जरूरत होती है ताकि टीम का प्रत्येक सदस्य सक्रिय बना रह सके। आपका उत्साह कार्य पर आपकी टीम की कार्यकुशलता में वृद्धि करने में मदद करता है। पूरी टीम को थोड़ा सा प्रेरित कर आप अपने कार्यस्थल को अधिक गतिशील बनता हुआ देखने में कामयाब हो सकते हैं।

सही समय पर धक्का मारें : मीडिया की आलोचना कई बार कार्य पूरा करने में एक मददगार माध्यम की भूमिका भी निभाती है। इसी तरह सही समय पर शोर करना और सही व्यक्ति से संपर्क करना समय सीमा के भीतर काम पूरा करने और लक्ष्य हासिल करने में सहायक होता है। प्रतीक्षा न करें और यदि कोई समस्या है तो खतरे की घंटी बजाने में भी हिचकिचाए नहीं।

अच्छे का अच्छा अंत जरूरी नहीं : यदि प्रोजेक्ट सफलता पूर्वक संचालित किया गया है, उसके बावजूद यह जरूरी है कि आप संचालन के समय आई दिक्कतें, उनसे जुड़े लोगों के सामने रखें। यह इसलिए भी जरूरी है ताकि भविष्य में उन गलतियों का दोबारा दोहराव न हो और हम यह जानते हों कि कैसे समस्या का समाधान किया जाएगा।

बड़े काम के लिए बड़ा सोचें : आत्मविश्वास की कमी कई बार हमें ऊंचे लक्ष्य हासिल करने से रोक देती है। परिणामस्वरूप हम खुद को अधिक व और बेहतर करने के लिए प्रेरित नहीं कर पाते, जिसको करने की हम क्षमता रखते थे। बड़े सपने देखना ही उन सपनों को पूरा करने के लिए प्रेरित करता है।

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