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कांव-कांव

एक टेबलेट खाते ही हो जायेगा प्यारड्ढr दू ठो खा लेने पर दू गो से नहीं न हो जायेगा- टेबलेटवा का असर खत्म होने पर झगड़ा नहीं न होगा- 052फिर झाड़ू भी फूलझाड़ू जइसा दिखेगा क्या- काशिफ राा, जंतगढड़्ढr और एक सैंडल में उतर जायेगा प्यार का बुखार- रवि, लेसलीगंजड्ढr उ तो ठीक है, लेकिन बाबा काहे खुश हो रहे हैं- आर्यनड्ढr बदल गया राज काज का ढर्राड्ढr फाइल का रट भी कुछ घटेगा क्या- बासुकी यादवड्ढr रिस्क लेने में मजा आता हैड्ढr गुरुाी को देख कर तो ऐसा नहीं लगता है- मुकुल जी, चाईबासाड्ढr वैकल्पिक सरकार अब भी संभव : लालूड्ढr गैया को सीएम और भंइसिया को डिप्टी सीएम बना दीजिए- अजय रायड्ढr माने कि लूटे के मौका अभी भी है- महिलाएं ठान लें, तो केंद्र की गद्दी दूर नहीं : रायड्ढr लेकिन उन्हें बात-बात पर फुफकारने और दहाड़ने की आदत छोड़नी होगी- जीतेंद्र तिवारी, भरनोड्ढr इहे से बाबा हंसते हैं कि रोते हैं बुझइबे नहीं करता है- दिलीप रक्षितड्ढr भाजपा ही देश को सही दिशा देगी : मोदीड्ढr इसीलिए तो हम भी भाजपा में आ गये- नीलकंठ चंद्रवंशीड्ढr 2-3 दिन में सरकार बनने की संभावना : सुधीरड्ढr कोहरा के चलते बुझाइये नहीं रहा है कि कौन एमएलए कने है- मिंटूड्ढr ओबामा ने संभाली कमानड्ढr अब सतर्क हो जायें पाकिस्तान और तालिबान- डीएस थापा, डालटनगंजड्ढr पूर्व मंत्रियों ने वाहन और फाइलें लौटायींड्ढr बोरवा लौटायेंगे तब न मजा आयेगा- अरुण कु सिंह, धनबादड्ढr भाई और राज दोनों खोयाड्ढr तेरा मेला पीछे छूटा राही चल अकेला- विनीत, डालटनगंजड्ढr पूर्व सीएम को मिले वाहन वापस नहीं होंगेड्ढr हां, इ लोग फिर सीएम बना तो दिक्कते है- बिल्लो, धनबादबेकाम हो गये वजीरसूबे के वजीर अब बेकाम हो गये हैं। एक ही झटके में वजीर से विधायक बन गये। मन तो खट्ठा हो गया है सबका। लेकिन कोई क्या कर सकता है? पब्लिक को उनसे बहुते उम्मीद की थी। उम्मीदवे तोड़ दिये, तो पब्लिक का दिल नय टूटेगा। आखिर गरीब की हाय तो लगबे करती है, सो लग गयी। मलाई काट रहे थे सब के सब, लेकिन अब तो पकौड़ी पर संतोष करना पड़ेगा। पॉलिटिक्स में कुछो परमानेंट नय होता है। सब कुछ टेंपोररी। लेकिन वजीर लोग इसको बुझिये नय रहा था। सोचा कि इ गद्दी से कभी हटबे नय करंगे। लेकिन एसा होता नय है। अब प्रेसिडेंट रूल है। वजीर लोगन की गाड़ी, छकड़ा, लाव-लश्कर सभे छूट गया। सड़कों में लालबत्ती गाड़ियों की पांय-पूं, सांय-सूं नहीं सुनायी दे रही है। लोग इत्मीनान से सड़क पर चल रहे हैं। थाना-पुलिस सब एक्िटव हो गयी है। कचहरी, दफ्तर सभे जगह अफसर भी समय पर आ रहे हैं। आठ साल से तो लोकतांत्रिक सरकार चल रही थी। लेकिन इ लोकतांत्रिक सरकार से लोकतंत्र केतना मजबूत हुआ, इ तो आप बुझिये रहे हैं। इसलिए अब थोड़ा प्रेसिडेंट रूल का भी मजा लीजिये, शायद इससे कोई अच्छी चीज निकल कर आये।

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