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ओएनजीसी का सब्सिडी बिल 15 प्रतिशत बढा

ओएनजीसी का सब्सिडी बिल 15 प्रतिशत बढा

कच्चे तेल के मजबूत होते दाम और तेल विपणन कंपनियों के बढ़ते घाटे का असर अब तेल एवं गैस का उत्पादन करने वाली कंपनी तेल एवं प्राकतिक गैस निगम [ओएनजीसी] के ऊपर बढ़ते ईंधन सब्सिडी बोझ के तौर पर दिखने लगा है।

ओएनजीसी का चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में ईंधन सब्सिडी बिल एक साल पहले की तुलना में 15 प्रतिशत बढ़कर 3,000 करोड़ रुपये से ऊपर निकल जाने की संभावना है। उधर, पेट्रोलियम पदार्थों की बिक्री करने वाली कंपनियों इंडियन ऑयल कारापोरेशन लिमिटेड, भारत पेट्रोलियम कारपोरेशन और हिन्दुस्तान पेट्रोलियम कारपोरेशन को डीजल, घरेलू रसोई गैस और मिट्टी तेल की बिक्री उनकी वास्तविक लागत से कम पर होने के कारण जुलाई से सितंबर की तिमाही में 11,295 करोड़ रुपये का नुकसान होने का अनुमान है।

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार तेल विपणन कंपनियों को होने वाले इस नुकसान में से एक तिहाई सब्सिडी की भरपाई ओएनजीसी, ऑयल इंडिया और गेल इंडिया जैसी तेल एवं गैस के उत्पादन और परिवहन में लगी कंपनियों को करनी होती है। सब्सिडी भरपाई फार्मूला के अनुसार ओएनजीसी को इसमें से 3019 करोड़ रुपये की भरपाई करनी होगी। ओएनजीसी यह योगदान इंडियन ऑयल, हिन्दुस्तान पेट्रोलियम और भारत पेट्रोलियम को कच्चे तेल की सस्ते दाम पर बिक्री के रूप में की जायेगी।

ओएनजीसी ने वर्ष 2009-10 में दूसरी तिमाही में 2630 करोड़ रुपये की सब्सिडी दी थी और इस साल यह राशि 3019 करोड़ रुपये तक हो जाने की उम्मीद है। ऑयल इंडिया को 399 करोड़ और गेल इंडिया को 346 करोड रुपये की सब्सिडी देनी होगी। पेट्रोल के दाम हालांकि सरकार शिकंजे से मुक्त हो गये हैं लेकिन डीजल, रसोई गैस और मिटटी तेल की बिक्री अभी भी कंपनियों को सरकार द्वारा तय दाम पर ही करने होते हैं जिसपर उन्हें भारी घाटा उठाना पडता है।

पेट्रोलियम पदार्थों की बिक्री करने वाली कंपनियों को अभी भी डीजल की बिक्री पर 2.01 रुपये प्रति लीटर, एलपीजी सिलेंडर पर 188.47 रुपये प्रति सिलेंडर और मिट्टी तेल पर 15.52 रुपये लीटर का नुकसान उठाना पड़ रहा है।

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