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अयोग्य विधायकों पर फैसला टला, मामला बड़ी पीठ के हवाले

अयोग्य विधायकों पर फैसला टला, मामला बड़ी पीठ के हवाले

कर्नाटक में भाजपा के 11 विधायकों को अयोग्य ठहराए जाने के मुद्दे पर हाईकोर्ट की दो सदस्यीय पीठ सोमवार को एक राय पर नहीं पहुंच सकी और अब 20 अक्टूबर को तीसरे न्यायाधीश इसकी सुनवाई करेंगे। इसके साथ ही पीठ ने पांच निर्दलीय विधायकों को अयोग्य ठहराए जाने के मुद्दे को एक खंड पीठ को सौंप दिया जो दो नवंबर को इसकी सुनवाई करेगी।

मुख्य न्यायाधीश जेएस खेहर ने विधानसभाध्यक्ष केजी बोपैया द्वारा 11 भाजपा विधायकों को अयोग्य ठहराए जाने के फैसले को कायम रखा वहीं पीठ के दूसरे न्यायाधीश एन कुमार ने विधानसभाध्यक्ष के आदेश को दरकिनार कर दिया।
    
न्यायमूर्ति खेहर ने कहा कि 11 विधायकों को अयोग्य ठहराए जाने के मुद्दे की सुनवाई 20 अक्टूबर को तीसरे न्यायाधीश करेंगे। पांच निर्दलीय विधायकों के मामले में पीठ ने कहा कि हमारा मानना है कि इसे किसी अन्य पीठ को सौंपा जाना चाहिए। हम इसे किसी अन्य पीठ को सौंपेंगे।

विधानसभाध्यक्ष ने 10 अक्टूबर की रात भाजपा के 11 विधायकों के साथ पांच निर्दलीय विधायकों को दलबदल कानून के तहत अयोग्य ठहराया था। मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा को 11 अक्टूबर को विश्वासमत हासिल करना था।
    
विधानसभा में हंगामे के बीच विधानसभाध्यक्ष ने मुख्यमंत्री को ध्वनिमत से विश्वासमत मिल जाने की घोषणा की थी। विपक्ष ने इसका विरोध किया था। राज्यपाल हंसराज भारद्वाज ने विधानसभा की कार्यवाही को असंवैधानिक बताते हुए राष्ट्रपति शासन की सिफारिश कर दी थी।
 
लेकिन अगले ही दिन उन्होंने सरकार को 14 अक्टूबर को फिर से विश्वासमत हासिल करने का निर्देश दिया। वहीं हाईकोर्ट ने 11 भाजपा विधायकों को अयोग्य ठहराए जाने के मुद्दे पर फैसला 18 अक्टूबर तक के लिए सुरक्षित रख लिया था। दूसरी बार सरकार ने 106 मत हासिल किए जबकि विश्वास मत के विरोध में 100 मत आए।
    
पीठ ने कहा कि उसने चार मुद्दों पर विचार किया। इन मुद्दों में नियमों का उल्लंघन, स्वाभाविक न्याय का सिद्धांत, विधायकों के उल्लंघन के संबंध में संविधान के 10वें अनुच्छेद का पैरा 2(1)(ए) और गड़बड़ियां शामिल हैं।

नियमों के उल्लंघन के मुद्दे पर पीठ ने कहा कि यह अनिवार्य नहीं है वहीं स्वाभाविक न्याय के सिद्धांत पर पीठ ने कहा कि इसका अनुसरण किया गया है। विधानसभाध्यक्ष की ओर से गड़बड़ियों के संबंध में पीठ ने कहा कि मामले में दलीलें किसी नतीजे पर पहुंचने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। लेकिन दलबदल कानून के तहत पैरा 2(1)(ए) के तहत अयोग्य ठहराए जाने के मुद्दे पर पीठ में मतभेद रहा। न्यायमूर्ति खेहर ने कहा कि मैं विधानसभाध्यक्ष के फैसले की पुष्टि करता हूं। न्यायमूर्ति एन कुमार ने कहा कि मैं फैसले को खारिज करता हूं।

भाजपा के वकील सत्यपाल जैन ने कहा कि 11 भाजपा विधायकों को अयोग्य ठहराए जाने के संबंध में अदालत ने कहा है कि स्वाभाविक न्याय के सिद्धांत और नियमों या प्रक्रियाओं का कोई उल्लंघन नहीं हुआ है। पिछले हफ्ते सुनवाई के दौरान भाजपा के विधायक ने दलील दी थी कि मुख्यमंत्री के खिलाफ भाजपा के 11 विद्रोही विधायकों द्वारा राज्यपाल को ज्ञापन सौंपना पार्टी की सदस्यता स्वैच्छिक रूप से छोड़ने के बराबर है।

वहीं असंतुष्ट विधायकों की दलील थी कि उन्होंने मुख्यमंत्री पर सवाल खड़े किए थे और इसका अर्थ पार्टी की सदस्यता छोड़ना नहीं है और इस आधार पर उन्हें अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता। निर्दलीय विधायकों की दलील थी कि वे भाजपा का हिस्सा नहीं हैं और इस आधार पर उनके खिलाफ दलबदल कानून लागू नहीं होता।

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