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दिल जीतने के बाद नौकरी की तलाश में जुटा ‘शेरा’

राष्ट्रमंडल खेल-2010 के शुभंकर शेरा बने सतीश बिदला के लिए बीते 10 महीने किसी हसीन सपने से कम नहीं थे। अब जबकि राष्ट्रमंडल खेल समाप्त हो चुके हैं और साथ ही शेरा की भूमिका भी खत्म हो चुकी है, बिदला अपने लिए नई नौकरी तलाशने में जुटे हैं।

23 वर्षीय बिदला ने कहा, ‘‘मैंने शेरा बनकर हर एक लम्हे को जिया है। अब मुझे शेरा की कमी खल रही है। गायक शान के साथ समापन समारोह में अंतिम बार सबसे सामने आना मेरे लिए सबसे कठिन था।’’

बिदला ने कहा, ‘‘शेरा बनना मेरे लिए एक नौकरी की तरह था। मुझे दरअसल आयोजन समिति के जनसंचार विभाग ने अपने साथ जोड़ा था। इसके बाद मेरे मिलनसार व्यक्तित्व को देखते हुए मुझे शेरा बनने की जिम्मेदारी सौंपी गई।’’

बिदला ने चण्डीगढ़ से कक्षा बारहवीं की परीक्षा उर्त्तीण करने के बाद ढाई साल पहले दिल्ली लौटने का फैसला किया था। वह नौकरी तलाश रहे थे, तभी उनकी किस्मत की बदौलत आयोजन समिति ने उन्हें अपने साथ जोड़ लिया।

बिदला ने कहा, ‘‘शेरा के तौर पर मेरी दिनचर्या आम लोगों की तरह थी लेकिन शेरा की लोकप्रियता के कारण मेरा काम काफी कठिन होता चला गया। तयशुदा कार्यक्रम के मुताबिक मुझे सुबह नौ बजे से शाम छह बजे तक शेरा की पोशाक पहननी थी। शेरा बनकर मैंने स्कूलों, कॉलेजों, बाजारों का दौरा किया और कई अतिविशिष्ठ लोगों से मिला। मेरे लिए यह जीवन के सबसे अच्छे पल थे।’’

बिदला ने बताया कि शेरा बनकर वह स्वतंत्रता दिवस परेड के दौरान राष्ट्रपति प्रतिभा पाटील और कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी से मिले थे।

अब आगे क्या?

इस सवाल पर बिदला ने कहा कि अभी वह लगभग ढाई महीने तक जनसंचार विभाग से साथ ही जुड़े रहेंगे और फिर अपने लिए नई नौकरी तलाश करेंगे।

बिदला को नौकरी तलाशने में दिक्कत न हो इसके लिए जनसंचार विभाग ने भी तैयारी कर रखी है। विभाग के एक अधिकारी ने कहा, ‘‘करार समाप्त होने के बाद हम कोशिश करेंगे कि बिदला को किसी कंपनी में नौकरी मिल जाए। हम चाहते हैं कि बिदला के साथ-साथ शेरा बनने वाले दूसरे युवक मानुग्या को भी नौकरी मिल जाए।’’

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