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..तो पानी पीते रहो

सुबह-सुबह ही वह एक टूअर पर निकल गए थे। कार से ही लंबा रास्ता तय कर रहे थे। काफी देर से वह लैपटॉप पर ही जुटे पड़े थे, लेकिन अब उनका दिमाग थकने लगा था और प्यास लगने लगी थी। 

‘हमारे दिमाग को खूब पानी चाहिए, ताकि वह कायदे से अपने काम कर सके। सूखा होते ही वह बाकी शरीर को सप्लाई करने में कोताही करता है।’ यह कहना है टैक्सास यूनिवर्सिटी के जोशुआ गोविन का। वह दिमाग पर लगातार रिसर्च में जुटे हुए हैं।
 
हमारे शरीर को लगातार पानी चाहिए। यह हम जानते हैं, लेकिन दिमाग को भी उसकी जरूरत होती है, इसकी ठीक-ठीक जानकारी हमें नहीं है। जोशुआ यही कह रहे हैं कि हमारे दिमाग के लिए भी पानी की जरूरत होती है। असल में दिमाग की कोशिकाओं को पूरे शरीर से संपर्क करने के लिए पानी चाहिए। अपने दिमाग को सूखापन कतई पसंद नहीं है। वह तरावट चाहता है।
 
बचपन से ही हम सुनते आए हैं कि पानी खूब पीना चाहिए। हममें से जो पानी कम पीता है, उसे अक्सर टोका ही जाता है। शरीर में पानी नहीं होता, तो तमाम दिक्कतें शुरू हो जाती हैं। हम पानी की कमी को बर्दाश्त नहीं कर पाते। हमारा पूरा सिस्टम ही गड़बड़ा जाता है, लेकिन दिमाग पर भी उसका इतना ज्यादा असर होता है! 

दिमाग ही हमारे पूरे शरीर को कंट्रोल करता है। इसीलिए कभी-कभी जब हम गुस्से में होते हैं, तो बुजुर्ग कहते हैं चल, ठंडा पानी पी ले यानी पानी से हमारा गुस्सा शांत हो जाता है। कभी-कभी हमें जब महसूस होता है कि थक गए हैं, तो  चाय-पानी करने से ही थकान दूर होने लगती है। सालों की रिसर्च बताती है कि जब हमारे शरीर में पानी की कमी होने लगती है, तो हमें फोकस करने में दिक्कत आती है। तो क्यों दिमाग को परेशान करते हो? पानी पीते रहो न।

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