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जीएम मच्छर लेगा डेंगू से टक्कर

डेंगू मच्छर के दंश की दहशत और बुखार से पीड़ित लोगों के लिए राहत देती खबर यों है कि अब जेनेटिकली मॉडिफाइड यानी जीएम मच्छर की नई नस्ल तैयार कर ली गई है। पिछले दिनों मलेरिया हैल्थ मिनिस्ट्री से जारी एक रिपोर्ट में बताया गया है कि यहां के वैज्ञानिकों द्वारा मच्छर की जीएम नस्ल को डिजाइन कर उसे ‘फील्ड ट्रायल’ यानी परीक्षण प्रयोग के लिए उतार दिया गया है।

इसे विशेष तौर पर डेंगू बुखार से टक्कर लेने के लिए तैयार किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार मच्छर की नई पीढ़ी प्रारंभिक अवस्था में ही कालकलवित हो जाएगी और रोग का यह वाहक रोग के विस्तार पर रोक लगाएगा। फिलहाल प्रयोगशाला में जीएम मच्छरों की फौज तैयार की जा रही है। यह अपने आपको पहला और प्रभावी परीक्षण है।

रिपोर्ट के अनुसार जीएम नर एडीस मच्छर की पहली खेप एशिया में इस वर्ष पहुंचा दी जाएगी, जिसमें 2000 से 3000 तक मच्छर होंगे। शोधकर्ताओं का दावा है कि उनका यह परीक्षण जल्द ही पूर्ण होगा और डेंगू सफाए में सहायक होगा।

नींद कहां सोती है, अब पता चला
नींद का संबंध मस्तिष्क से माना जाता है। चूंकि मस्तिष्क की नजदीकी चेहरे से है, इसलिए यह पहले चेहरे पर प्रगट होती है। मगर नींद कई बार यों उड़ जाती है कि आती ही नहीं। नींद खुद कहां जा सोती है, इस बात का पता पिछले दिनों वाशिंगटन स्टेट यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने लगा लिया है। उन्होंने मस्तिष्क में वह स्थान ढूंढ़ने का दावा किया है जो नींद लाता है।

शोधकर्ता जेम्स क्रुंगर का कहना है कि मस्तिष्क में नींद की प्रक्रिया स्पष्ट करने वाला स्थान ढूंढ निकाला है, अत: अब नींद में उपयोगी उपकरणों की सहायता से इसे संचालित किया जा सकेगा। यानी इसके छेड़ते ही नींद को अंखियों का निमंत्रण दिया जा सकेगा।

इस संदर्भ में जर्मनी के मैक्स प्लैंक इंस्टीट्यूट फॉर बायोलॉजिकल साइबरनॉटिक्स के शोधकार्य बताते हैं कि नींद आने पर शरीर कुम्हलाने लगता है। पहला प्रभाव चेहरे पर पड़ता है। उसकी मांसपेशियां ढीली पड़ने लगती हैं, वह विकृत होने लगता है, मगर बाद में शांत हो जाता है।

जल भर लाए उल्का पिंड
पिछले दिनों यूनिवर्सिटी ऑफ सेंट्रल फलोरिडा के वैज्ञानिकों ने पृथ्वी पर आए उल्का पिंड को टटोला तो उन्हें जल और कार्बनिक कणों की मात्र नजर आई।  मात्र छह माह में यह दूसरा मौका है कि जब उल्कापिंड से दूसरी बार जल की प्राप्ति हुई है। ज्ञात हो कि अप्रैल माह के अंत में ‘24 थेमिस’ उल्का पिंड से पहली बार इसी टीम ने जल होने की पुष्टि की थी और अब फिर ‘65 साइवेल’ उल्कापिंड से जल और कार्बनिक कण मिले हैं।

टीम के मुखिया हम्वटरे कैम्पिन का मानना है कि यह खोज इस अवधारणा की पुष्टि करती है कि धरती के विकास के प्रारंभिक दौर में जब उल्कापिंडों की लगातार बारिश हुई थी तो वह अपने साथ पानी भी लाए, जिसने धरती पर जीवन पनपने में मदद की।

उपरोक्त तथ्य की पुष्टि नासा के वैज्ञानिकों ने भी की है, संस्था की शक्तिशाली दूरबीन द्वारा ‘65 साइवेल’ पर एक माइक्रोन के लगभग की बर्फ की पर्त देखी गई थी। कुछ वैज्ञानिकों ने तो यहां तक अनुमान लगाया है कि इसी प्रकार के उल्का पिण्डों ने पानी लाकर धरती पर सागर सजाए। यह पानी निश्चित ही सौरमंडल से आया।

‘अग्नि- कक प्लस’ अगले बरस
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन से आई ताजा रिपोर्ट के अनुसार देश की शान मिसाइल निर्माण की श्रंखला में अब ‘अग्नि-II प्लस’ आ जुड़ी है। संगठन के महानिदेशक श्री वी. के. सारस्वत के अनुसार यह ‘प्लस’ वाकई अतिरिक्त मारक क्षमता वाली है, इससे पूर्व जो अग्नि-II प्लस तैयार की जा चुकी है उसकी मारक दूरी दो हजार किलोमीटर है जबकि उसकी मारक क्षमता और दूरी दोनों ही अपेक्षाकृत अधिक है।

इस समय वैज्ञानिकों की टोली इसकी जांच और विविध परीक्षणों में लगे हुए हैं। इसे सुपरसॉनिक स्वरूप लिए बताया जा रहा है और आशा की जा रही है कि इसे ब्रह्मोस एयरोस्पेस लिमिटेड द्वारा भारत और रूस द्वारा का संयुक्त रूप से वर्ष 2011 के प्रारंभ में छोड़ दिया जाएगा।

नरम हड्डियों की गिरफ्त में दिल
अमेरिकी वैज्ञानिकों ने नए तथ्यों में बताया है कि ऑस्टियोपोरोसिस यानी हड्डियों के रोग हृदय रोग का भी खतरा बन रहे हैं। रॉयल ओक स्थित विलियम ब्लूमाट हॉस्पिटल की रिपोर्ट के अनुसार महिलाओं में आमतौर पर रजोनिवृत्ति के बाद हड्डियां नरम हो जाती हैं जो ऑस्टियोपोरोसिस को जन्म देती हैं। यही स्थिति दिल को प्रभावित करती है।

शोधकर्ता डॉ़ हिलेरी ट्रॉन के अनुसार हड्डी और दिल के संबंध को उजागर करता यह पहला शोध है। इसमें उन्होंने 209 लोगों को चुना जिसमें महिलाएं अधिक थीं। बाद में स्पष्ट हुआ कि ऑस्टियोपोरोसिस से प्रभावित महिलाओं में रुधिर वाहनियों के क्षतिग्रस्त होने की संभावना पांच गुना अधिक होती है।  
- कुलदीप शर्मा

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