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ठेके पर आश्रित है कम्प्यूटर शिक्षा

रााकीय विद्यालयों में कम्प्यूटर की मुकम्मल पढ़ाई शुरू होने में काफी वक्त लगेगा। सरकार ने कंप्यूटर तो 50-50 भिावा दिए लेकिन पढ़ाई ठेके पर छोड़ दी। प्राइवेट कंपनी ने कंप्यूटर लगाए, वही टीचर उपलब्ध कराती है।ड्ढr छात्रों से प्रतिमाह 27.70 रुपए फीस लीोाती हैोो कंपनी के खाते मेंोाती है। कक्षा छह से आठ तक कम्प्यूटर अनिवार्य है लेकिन यूपी बोर्ड के कोर्स में यह वैकल्पिक विषय के रूप में शामिल है लिहा कुछ भी अनिवार्य नहीं दिखता। न कम्प्यूटर का होना, न शिक्षक का रहना या पढ़ाना और न ही छात्रों का पास होना। तभी तो गोरखपुरोिले के बाँसगाँव में पिछली बरसात में छत टपकने से 50 कंप्यूटर पानी माँग गए। अधिकारी कहते हैं कम्प्यूटर की पढ़ाई अंग्रेाी माँगती है और सरकारी स्कूलों में अंग्रेाी का तो भगवान ही मालिक है।ड्ढr गोरखपुर शहरी क्षेत्र के स्कूलों में थोड़ा गनीमत है लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में कंपनी के लोगोाते ही नहीं कंप्यूटर देखने। महाराणा प्रताप इंटर कॉलेा सरीखे भी हैंोो प्रबंधन के खर्चे पर बच्चों को पढ़ाने के लिए बीटेक रखे हुए हैं। एडी गर्ल्स इंटर कॉलेा की प्रधानाचार्य प्रतिभा श्रीवास्तव कहती हैं कि छात्राओं की रुचि कंप्यूटर में अधिक है लेकिन एमाी इंटर कॉलेा के प्रधानाचार्य तर्क देते हैं कि छात्र इसलिए कंप्यूटर से भाग रहे क्योंकि आर्ट्स में नंबर अधिक मिलते हैंोिससे डिवीान बनती है।ड्ढr बस्ती मेंोो छात्र कम्प्यूटर पढ़ना चाहते हैं वे प्राइवेट की ओर भाग रहे हैं। सरकार ने उदारता से कम्प्यूटर सेट तो बाँटे लेकिन इसकी राह में अभी कई रोड़े हैं। रााकीय कॉलेा ही नियमित क्लास नहीं लगाते फिर दूसरों की क्या बिसात।ड्ढr बाहरी शिक्षक क्या सिखाएँगे:पेा 2

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