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आतंकी शिविर ही ब्रह्मोस के निशाने पर!

राजस्थान में पोखरण रां में मंगलवार को धरती से धरती पर मार करने वाली ब्रह्मोस क्रूा मिसाइल के उन्नत संस्करण का परीक्षण पाकिस्तान स्थित आतंकी शिविरों को ध्वस्त करने की योजना को ध्यान में रखकर ही किया गया था। उन्नत संस्करण में एक नया सॉफ्टवेयर लगाया गया था जो ठीक से काम नहीं कर सका। इस परीक्षण को देखने के लिए स्वयं थलसेनाध्यक्ष जनरल दीपक कपूर मौजूद थे। डीआरडीओ ने पहले इसे सफल परीक्षण बताया लेकिन अब कहा गया है कि सफल प्रक्षेपण के बावजूद मिसाइल लक्ष्य से दूर गिरी। विश्वसनीय सूत्रों के मुताबिक ब्रह्मोस मिसाइल में इस बार ‘मिशन सॉफ्टवेयर फॉर होमिंग हेड’ नाम का सॉफ्टवेयर लगाया गया था। यह सॉफ्टवेयर भारतीय वैज्ञानिकों ने ही तैयार किया था। ब्रह्मोस मिसाइल रूस के सहयोग से बनाई गई है लेकिन इसके लिए सॉफ्टवेयर तैयार करने का जिम्मा भारतीय वैज्ञानिकों का है। नए सॉफ्टवेयर का उद्देश्य बड़े मकानों के बीच घिर किसी छोटे लक्ष्य को ध्वस्त करने के लिए मिसाइल को निर्देशित करना है। मंगलवार को हुए परीक्षण में साफ्टवेयर से निर्देशित ‘सीकर’ यानी लक्ष्य ढूंढ़ने वाले यंत्र ने ठीक से काम नहीं किया। नया सॉफ्टवेयर मिसाइल को लक्ष्य से भटके बिना तेजी से मुड़ने में भी मदद दे सकता है। ब्रह्मोस मिसाइल एक क्रूा मिसाइल है जो दागे जाने के बाद अपने लक्ष्य को ढूंढ़ते हुए उस तक पहुंचती है। लेकिन मौजूदा ब्रह्मोस सबसे पहले बड़े लक्ष्य को ही ध्वस्त करती हैं। मान लीजिए एक साथ पांच ब्रह्मोस छोड़ी गईं तो पहली मिसाइल सबसे बड़े, दूसरी उससे छोटे और इसी क्रम में बाकी मिसाइलें भी आकार के मुताबिक लक्ष्य को ध्वस्त करती हैं। सेना चाहती है कि मिसाइल को इस काबिल बनाया जाए कि जरूरत पड़ने पर यह बड़े लक्ष्यों को छोड़ कर पहले छोटे लक्ष्य को ध्वस्त करने में सक्षम हो। इसी जरूरत को ध्यान में रखकर भारत में ही यह नया सॉफ्टवेयर तैयार किया गया लेकिन यह कामयाब नहीं हुआ। सूत्रों का कहना है कि जरूरत पड़ने पर मिसाइल को पाकिस्तान स्थित आतंकी शिविरों या अन्य लक्ष्यों को नष्ट करने के लिए छोड़ा जा सकता है।

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  • Web Title: आतंकी शिविर ही ब्रह्मोस के निशाने पर!