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मजबूरी में सुप्रीम कोर्ट जाएँगे हिन्दू पक्षकार

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की ओर से अयोध्या विवाद पर हाईकोर्ट के फैसले के साथ सुप्रीम कोर्ट में अपील किए जाने को हरी झण्डी दिए जाने के बाद हिन्दू पक्षकारों ने भी मजबूरी में ही सही लेकिन सुप्रीम कोर्ट जाने का एलान कर दिया है। इसी के साथ विराजमान रामलला पक्ष और बाबरी मस्जिद के मुद्दई हाशिम अंसारी ने समझौते के लिए चल रही वार्ता को भी जारी रखने का एलान किया है।

उधर एक अन्य हिन्दू पक्षकार निर्माही अखाड़ा अब सुप्रीम कोर्ट में रामजन्मभूमि के बँटवार के खिलाफ अपील करेगा।


लखनऊ में पर्सनल लॉ बोर्ड की बैठक के बाद सुप्रीम कोर्ट जाने के मसले पर संशय खत्म होने पर अयोध्या में बाबरी मस्जिद के मुद्दई अंसारी ने कहा कि वह मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और सुन्नी वक्फ बोर्ड के फैसलों से अलग नहीं हैं। यदि हाईकोर्ट के आदेश को वक्फ बोर्ड की ओर से सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जाती है तो भी समझौते के लिए बातचीत का दौर जारी रहेगा। इसमें कोई रुकावट नहीं आएगी। पर्सनल लॉ बोर्ड और वक्फ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट जाने की स्थिति में समझौता वार्ता को स्थगित करने का कोई एलान नहीं किया है। उन्होंने कहा कि वार्ता चलती रहेगी और जो फार्मूला तैयार होगा उसे वक्फ बोर्ड के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट में रखा जा सकता है।


उधर प्रमुख हिन्दू पक्षकार विराजमान रामलला पक्ष के प्रतिनिधि और रामजन्मभूमि न्यास के वरिष्ठ सदस्य डॉ. राम विलास दास वेदांती ने कहा है कि सुन्नी वक्फ बोर्ड के सुप्रीम कोर्ट जाने पर उन्हें भी जाना पड़ेगा। अब विराजमान रामलला पक्ष रामजन्मभूमि के बँटवारे के खिलाफ सबसे बड़ी अदालत में अपील करेगा। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट से यह गुजारिश भी की जाएगी कि हाईकोर्ट की ओर से किए गए निर्णय पर अमल की समय सीमा भी तय की जाए। जल्द ही विराजमान रामलला पक्ष को जन्मभूमि उपलब्ध कराई जाए ताकि भव्य राममन्दिर का निर्माण शुरू हो।


दूसरे हिन्दू पक्षकार निर्माेही अखाड़ा के सरपंच महंत भास्कर दास ने कहा कि पहले से ही उम्मीद की जा रही थी कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की वर्किग कमेटी पूर्व में लीगल कमेटी के निर्णय पर ही मुहर लगाएगी। ऐसे में अब निर्मोही अखाड़े की ओर से सुप्रीम कोर्ट में जन्मभूमि के विभाजन के खिलाफ अपील किए जाने का रास्ता साफ हो गया है।
उधर अयोध्या पर समझौता वार्ता के मध्यस्थ अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत ज्ञानदास ने कहा कि हिन्दू व मुस्लिम पक्षकारों में से जो भी सुप्रीम कोर्ट जाना चाहता है जाए, अंत में वहाँ से भी समझौता वार्ता करने ही आना पड़ेगा। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भी विवाद का अन्तिम समाधान बातचीत से ही होगा।


भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष विनय कटियार ने कहा कि यदि वक्फ बोर्ड सुप्रीम कोर्ट जा रहा है तो हिन्दू पक्षकारों को भी जाना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि हिन्दू पक्षकार सुप्रीम कोर्ट होते हुए राममन्दिर निर्माण के लिए जनता की अदालत में भी जाएँगे। इस मसले का हश्र भी शाहबानो प्रकरण की तरह होना है, इसलिए संसद में कानून का निर्माण ही समस्या का अन्तिम समाधान है। टाइटिल सूट से इस मसले का हल नहीं होने वाला। ऐसे में केन्द्र सरकार संसद में बिल लाने को तैयार रहे।

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