DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

दिल्ली अब ओलंपिक के लिए तैयार है

कॉमनवेल्थ गेम्स के सफल आयोजन के बाद विदेशी खिलाड़ियों की वापसी हो रही है। सफलता के श्रेय के लिए सभी एजेंसियां अपनी पीठ थपथपा रही हैं। इसे लेकर सरकार में भी कोल्डवॉर चल रहा है। अब सरकार के समक्ष चुनौती तैयार किए गए खूबसूरत ढांचे को बनाए रखने की है। खेलों की व्यवस्था सरकार के लिए कितनी चुनौतीपूर्ण रही, इस मसले पर दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित से रूबरू हुए वरिष्ठ संवाददाता पंकज रोहिला :

आयोजन में सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती क्या रही?
खेलगांव को संवारना ही सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती रही क्योंकि छोटी-छोटी खामियां थीं, जो बहुत बड़ी हो गई थीं। इसे वक्त से पहले सजाना था। हालत यह थी कि खेल गांव की 73 में से 66 लिफ्ट खराब थीं और इंटरनेशनल एरिया बेहतर तो था, पर वहां कुत्ते घूम रहे थे। इस व्यवस्था को ठीक किया गया।

सफलता का सेहरा आप किसके सिर बांधेगी?
इन खेलों को सफल बनाना किसी एक एजेंसी के बस का कार्य नहीं था। खेलों के प्रति जिस प्रकार का नकारात्मक रुझान बना हुआ था। उस स्थिति में हम सही से अपनी बात कह भी नहीं सकते थे। हमें सिर्फ दिए गए लक्ष्य को पूर्ण करना था। प्रधानमंत्री व कैबिनेट सचिव को इसकी जानकारी दी गई थी। हालत यह थी कि कहीं रेलिंग के शीशे नहीं लगे थे और कर्मचारियों की भी कमी थी। इस कार्य को स्पेशल ऑफिसर लगाकर पूर्ण किया गया। इसमें मैं किसी की आलोचना नहीं कर रही। यह वास्तविकता थी। इसे वक्त से पूर्व संवारा गया। इसमें सभी एजेंसियों ने आगे बढ़कर काम किया।

क्या खाली खेल स्टेडियम ने भी आपकी चिंता बढ़ाई?
खेलों के शुरू होने से पूर्व सभी खेल आयोजन स्थलों से जानकारी आ रही थी कि कहीं पर टिकट उपलब्ध नहीं है। सभी टिकट बिक गए हैं, लेकिन खेलों के शुरू होने के बाद स्थिति एकदम अलग थी। मैंने जब देखा कि खेलों में दर्शक नहीं हैं तो इस मामले में इस बात की सिफारिश की कि बच्चों के स्कूल- कॉलेज आईकार्ड को तवज्जो दी जाए। इसके आधार पर छात्रों को स्टेडियम में प्रवेश मिले। इसके बाद जब भारत को पदक मिलने लगे तो इन खेलों जान ही आ गई। छुट्टी न होने के बाद भी कहीं स्टेडियम ऐसे नहीं थे, जो खाली थे।

क्या अब दिल्ली ओलम्पिक के बिड के लिए तैयार है?
हमें पूरा विश्वास है कि हम ओलंपिक के लिए बिड कर सकते हैं। दुनिया से आए खिलाड़ियों के साथ- साथ वर्ल्ड मीडिया ने भी इन खेलों की व्यवस्था को सराहा है। इससे दिल्ली का उत्साह और बढ़ा है। पुलिस व सुरक्षा एजेंसियों ने भी इस दौरान बेहतरीन कार्य किया है।

पहले आप नर्वस थीं। अब आपका क्या कहना है?
खेलों से पूर्व दिल्ली में सभी विपरीत परिस्थितियां थीं। खेल गांव यमुना नदी के किनारे बनाया गया है और यमुना ऊफान पर थी। खेलों से पहले नदी में रिकार्ड पानी छोड़ा गया। बारिश का दौर थम नहीं रहा था। नमी की वजह से मार्गो का सुधार नहीं हो पा रहा था। बारापूला व सलीमगढ़ बाईपास योजना लटकी हुई थी, जो सीधे खेल से जुड़ी थी, लेकिन जैसे ही दिल्ली के मौसम में बदलाव आया, सभी कार्यो को प्रमुखता के आधार पर किया गया।

वर्ल्ड क्लास स्टेडियम तो बन गए अब इनके लिए आगे क्या योजना है?
नए स्टेडियम की व्यवस्था बनाए रखना सरकार के लिए चुनौती है। इसके लिए सरकार की योजना है कि दिल्ली में अलग-अलग अकादमी गठित की जाए, ताकि खेलों से जुड़े बच्चों इनका इस्तेमाल करते रहें। इस योजना पर सरकार विचार कर रही है।

इस आयोजन के बाद आप क्या करेंगी?
दो दिन की छुट्टी मनाएंगे और इसके बाद फिर से काम में लगेंगे। कई योजनाएं पूरी करनी हैं।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:दिल्ली अब ओलंपिक के लिए तैयार है