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भारत के लिए भाग्यशाली रहा है कोच्चि का नेहरू स्टेडियम

भारत के लिए भाग्यशाली रहा है कोच्चि का नेहरू स्टेडियम

टेस्ट सीरीज़ में ऑस्ट्रेलिया को 2-0 से धूल चटाने के बाद भारत रविवार से शुरू हो रही तीन मैचों की एकदिवसीय सीरीज़ में जीत के साथ शुरूआत करने कोच्चि के उस नेहरू स्टेडियम में उतरेगा जो उसके लिए भाग्यशाली रहा है।
   
नेहरू स्टेडियम पर भारत ने छह मैच खेले जिसमें से चार में उसे जीत मिली जबकि केवल दो में उसे हार का सामना करना पड़ा। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ हालांकि तीन साल पहले दो अक्टूबर 2007 को इस मैदान पर हुए अंतिम मुकाबले में भारत को 84 रन से शिकस्त का सामना करना पड़ा था। ऑस्ट्रेलिया ने इस मैदान पर अब तक दो मैच खेले हैं जिसमें से एक में उसे जीत मिली जबकि एक में उसे हार का सामना करना पड़ा।
   
भारत ने एकदिवसीय सीरीज़ के लिए सचिन तेंदुलकर, जहीर खान, आक्रामक सलामी बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग और हरभजन सिंह जैसे अनुभवी खिलाड़ियों को आराम दिया है और ऐसे में टीम इंडिया की उम्मीदों का बोझ टीम में वापसी करने वाले युवराज सिंह और कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के अलावा युवा सुरेश रैना, रोहित शर्मा और तेज गेंदबाज आशीष नेहरा पर होगा।
   
भारत को हालांकि रविवार से होने वाले इस मैच में सहवाग की कमी खल सकती है जिन्होंने इस मैदान पर दो मैचों में 67 की बेहतरीन औसत से 134 रन बनाए हैं। टेस्ट सीरीज़ से बाहर रहने के बाद वनडे टीम में वापसी करने वाले युवराज अब तक इस मैदान पर तीन मैचों में 24.66 की औसत से केवल 74 रन बना पाए हैं और वह इस मैदान पर अपने रिकॉर्ड में सुधार करते हुए धमाकेदार पारी खेलने के लिए बेताब होंगे।
   
कप्तान धोनी भी यहां तीन मैचों में 35.50 की औसत से 71 रन ही बना पाए हैं जबकि रैना का औसत केवल 21 है। रैना ने यहां केवल एक मैच खेला है। भारत को इसके अलावा युवा विराट कोहली, रोहित शर्मा, शिखर धवन, रवींद्र जडेजा, सौरभ तिवारी और मुरली विजय से भी बल्लेबाजी में बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद होगी।
गेंदबाजी में भी भारत को जहीर और हरभजन की कमी खलना तय है। इन दोनों की गैरमौजूदगी में गेंदबाजी आक्रमण की अगुआई करने वाले आशीष नेहरा ने इस मैदान पर अब तक सिर्फ एक मैच खेला है जिसमें वह सिर्फ एक विकेट हासिल कर पाए थे।
   
नेहरा को हालांकि प्रवीण कुमार, मुनाफ पटेल और आर विनयकुमार का अच्छा साथ मिलेगा जबकि स्पिन गेंदबाजी का दारोमदार आर अश्विन के कंधों पर होगा। भारत को गेंदबाजी में मास्टर ब्लास्टर और दुनिया के सबसे सफल बल्लेबाज तेंदुलकर की कमी खल सकती है जिन्होंने अपनी कामचलाउ स्पिन से यहां चार मैचों में 14.80 की औसत से सर्वाधिक 10 विकेट हासिल किए हैं। दूसरी तरफ ऑस्ट्रेलिया की बात करें तो उसके लिए नेहरू स्टेडियम की पिच अंजान है और उसके किसी खिलाड़ी को इस मैदान पर खेलने का अनुभव नहीं है जो मेहमान टीम के कप्तान माइकल क्लार्क के लिए चिंता का सबब हो सकता है।

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