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आत्महत्या के बढ़ते मामले में माइक्रोफिनांस कंपनियों की जांच

आत्महत्या के बढ़ते मामले में माइक्रोफिनांस कंपनियों की जांच

आंध्र प्रदेश में माइक्रोफिनांस संस्थानों की कथित ज्यादती के चलते कर्जदार व्यक्तियों द्वारा आत्महत्या करने के मामले बढ़ने से राज्य सरकार ने इन संस्थानों पर लगाम लगाने के लिए एक अध्यादेश जारी किया है।
   
वहीं दूसरी ओर, रिजर्व बैंक ने माइक्रोफिनांस कंपनियों की कार्यप्रणाली का अध्ययन करने के लिए एक समिति का गठन करने की घोषणा की है।
   
आंध्र प्रदेश के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पिछले 45 दिनों में आत्महत्या से मरने वाले लोगों की संख्या 30 बताई। उन्होंने कहा कि ये संस्थान जिस तरह के हथकंडे अपना रहे हैं उससे राज्य के विभिन्न जिलों में आत्महत्या के मामले बढ़ रहे हैं।
   
राज्य के पुलिस महानिदेशक क़े अरविन्द राव ने बताया कि इस साल जनवरी से विभिन्न जिलों से 21 लोगों की आत्महत्या के मामले सामने आए हैं। पिछले एक पखवाड़े में आत्महत्या के मामलों में बढ़ोतरी को देखते हुए यह आंकड़ा बढ़ सकता है।
   
उन्होंने संकेत दिया कि माइक्रोफिनांस संस्थानों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए राज्य की सीआईडी में एक विशेष प्रकोष्ठ का गठन किया जाएगा।

इस बीच, देश की सबसे बड़ी माइक्रोफिनांस कंपनी एसकेएस माइक्रोफिनांस ने शुक्रवार को कहा कि कंपनी के उधार लेने वाले जिन 17 लोगों ने आत्महत्या की है, वे डिफाल्टर नहीं थे। कंपनी ने हाल ही में अपने सीईओ सुरेश गुरुमणि को हटाया है।
   
टीडीपी और अन्य विपक्षी दलों का आरोप है कि माइक्रोफिनांस संस्थानों के रिकवरी एजेंट अक्सर गरीब लोगों का अपमान करते हैं जिससे लोग इस तरह का कठोर कदम उठाने को बाध्य हो रहे हैं।

आंध्र प्रदेश सरकार ने शुक्रवार को आंध प्रदेश माइक्रोफिनांस इंस्टीटयूशंस अध्यादेश, 2010 नाम से एक आध्यादेश जारी किया जिसे राज्य की कैबिनेट ने गुरुवार को ही मंजूरी प्रदान कर दी थी। राज्यपाल ईएसएल नरसिम्हन द्वारा मंजूरी दिए जाने के साथ ही शुक्रवार से यह लागू हो गया।

माइक्रोफिनांस संस्थान समाज के गरीब तबके को ऋण उपलब्ध कराते हैं। चूंकि ये संस्थान खुद बैंकों से ऋण लेते हैं, इसलिए वे ऋण लेने वालों से 36 प्रतिशत तक की दर पर ब्याज वसूलते हैं।

चंडीगढ़ में रिजर्व बैंक के गवर्नर डी़ सुब्बाराव ने कहा कि ऐसा देखा गया है कि माइक्रोफिनांस संस्थान ऊंची दर पर ब्याज वसूलते हैं, लेकिन अगर बैंक पहल करें तो कम दर पर ऋण मिल सकता है।

उन्होंने कहा कि हमने माइक्रोफिनांस संस्थानों की कार्यप्रणाली का अध्ययन करने के लिए एक उप समिति का गठन किया है और रिजर्व बैंक की अगली नीति पर इसका क्या असर है, उसे देखते हुए आगे कार्रवाई की जाएगी। वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने गुरुवार को कहा था कि केन्द्र माइक्रोफिनांस संस्थानों पर पैनी नजर रख रहा है।

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