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कन्याओं को जिमाकर खोला व्रत

नवरात्रों के सात दिनों तक चलने वाली पूजा और विधि विधान के बाद अष्टमी के दिन मंदिरों में भक्तजनों ने महागौरी की पूजा-अर्चना करके व  कन्याओं को जिमाकर उपवास खोले। मंदिरों में जहां श्रद्धालुओं को लंबी लाइनों में लगकर अपनी बारी आने का इंतजार करना पड़ा वहीं माता दुर्गा का रूप मानी जाने वाली छोटी कन्याओं को भोजन करने के लिए लोगों को काफी जद्दोजहद करनी पड़ी।


भक्तों ने की महागौरी की आराधना
शुक्रवार के दिन मंदिरों में लोगों की भारी भीड़ रही। मोहन नगर स्थित देवी मंदिर में सुबह से ही माता के दर्शन करने के लिए लोगों का तांता लगा। आलम यह था कि मंदिर को गेट से ही भक्तजनों को लाइन में खड़े होकर अपनी बारी आने का इंतजार करना पड़ा। वहीं दिल्ली गेट देवी मंदिर में भक्तों का जमावड़ा लगा रहा। सुबह बारह बजे तक मंदिर के प्रांगण में पैर रखने तक की जगह नहीं थी । कई लोगों ने धक्का-मुक्की में ही माता के दर्शन किये।
पूजन के लिए पड़ी कन्याओं की कमी
शहरा में जगह-जगह श्रद्धालु छोटी कन्याओं की तलाश करते दिखे। कविनगर निवासी पल्लव ने बताया कि  वैसे तो कम से कम सात कन्याओं को भोजन कराकर व्रत खोले जाते हैं लेकिन आस-पास लड़कियों की कमी होने की वजह से उन्होंने केवल दो कन्याओं को ही जिमाकर व्रत खोले। वहीं शास्त्री नगर निवासी कविता श्रीवास्तव का कहना है कि कन्याओं को माता का रूप माना जाता है इसलिए अष्टमी के दिन छोटी कन्याओं को भोजन कराया जाता है, लेकिन लोगों का लड़कियों को बोझ समझने की सोच के चलते समाज में लड़कियों का अनुपात कम हो गया हैं। इससे यह परंपरा धीरे-धीरे खत्म होती जा रही है।
क्या कहते हैं बेटी बचाओ आंदोलन के पदाधिकारी
समाजसेवी गुरी जनमेजा और वंदना चौधरी ने बताया कि उनके द्वारा पिछले चार सालों से यह आंदोलन चलाया जा रहा है। इस दौरान साल में कई बार लोगों को जागरूक करने के लिए रैली, सेमिनार आदि आयोजित किए जाते हैं। इससे पहले के मुकाबले अब लड़कियों का अनुपात लड़कों के बराबर आने लगा है।

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