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दोनों नेताओं में बयानबाजी

सिराजगंज में ट्रेन हादसा होने के बाद बीएनपी के अध्यक्ष, महासचिव और कई नेता लगातार यह कह रहे हैं कि यह बेगम जिया की सभा को बिगाड़ने के लिए सरकार की तरफ से किया गया सुनियोजित हमला था, जबकि संचार मंत्री ने इस घटना के लिए बीएनपी को ही जिम्मेदार ठहराया है। विवाद को बढ़ाते हुए प्रधानमंत्री स्वयं मैदान में कूद पड़ीं और कहा कि खालिदा जिया मीटिंग में जाने से पहले पास के जमुना रिजॉर्ट में हादसे का इंतजार कर रही थीं। इसका मतलब यह है कि वे उस हादसे में अपने कार्यकर्ताओं के मरने का इंतजार कर रही थीं, ताकि उसे आंदोलन का मुद्दा बना सकें। सिराजगंज से हटाकर नाटोर हादसे पर ध्यान केंद्रित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि बीएनपी के भीतर इतनी गुटबाजी है कि उसके नाते हिंसा हुई है। इसकी तस्वीरें कई अखबारों और चैनलों पर आ भी चुकी हैं।  
द डेली स्टार, बांग्लादेश

तमिलों के समर्थन का दावा
अमेरिका में रहने वाले चंद कट्टरपंथी तमिल श्रीलंका के खिलाफ गतिविधियां चलाते हैं। इसके विपरीत ज्यादातर तमिल देश और सरकार से प्यार करते हैं और विकास संबंधी कामों में उन्हें समर्थन देने को तैयार रहते हैं। पिछले 26 साल से विदेशों में रहने वाले तमिलों और श्रीलंकाई दूतावास के बीच किसी तरह का संवाद नहीं हुआ, इसलिए चंद उग्रवादियों को संवादहीनता का दुरुपयोग करने का मौका मिला। इस बीच श्रीलंका के दूतावास ने वाशिंगटन में जो अभियान चलाया है, उससे स्थितियां बदली हैं। अब अमेरिका में रहने वाले करीब 50 हजार श्रीलंकाई तमिलों की आबादी में से ज्यादातर ने युद्ध की व्यर्थता को महसूस कर लिया है और अब वे देश के साथ ही जाफना और दूसरे इलाकों के तमिलों की मदद करने के लिए तैयार हैं।
श्रीलंका टुडे, श्रीलंका

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