DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

आइपीएस तबादले में मुख्य सचिव ने की भारी चूक

आइपीएस तबादले के बाद मुख्य सचिव एके बसु की भूमिका पर सवाल खड़ा होने लगा है। मुख्य सचिव ने सुप्रीम कोट के आदेश की धज्जियां उड़ाते हुए सीधे बबसीट लिखा और तीन आइपीएस अधिकारियों को निगरानी में भेजने का अनुरोध कर डाला। आइपीएस तबादले के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद स्थापना पर्षद का गठन किया गया है।ड्ढr नियम है कि इस पर्षद की सहमति के बाद ही सरकार कोई तबादला कर सकता है। तबादला सरकार की सहमति पर ही होती है, लेकिन नियम का पालन करना पड़ता है। पहली बार ऐसा हुआ जब मुख्य सचिव ने सीधे बबशीट राजभवन को भेज दिये। उन्होंने यह भी बताना जरूरी नहीं समझा कि निगरानी में आइजी या डीआइजी में से किसी एक ही पदाधिकारी का पद स्वीकृत है और इन दो सीनियर पदों पर किसी एक का ही पदस्थापन होता है। अब जो तबादले हुए हैं, उसमें झारखंड में निगरानी के पद पर डीजी नेयाज अहमद पहले से पदस्थापित हैं। आइजी या डीआइजी में से कोई अधिकारी वहां पदस्थापित नहीं था।ड्ढr 21 जनवरी को जो तबादला हुआ, उसमें दोनों पदों पर पदाधिकारी भेज दिये गये। अब इन दो में से किसी एक को ही वेतन मिलेगा। मुख्य सचिव को इस पर भी ध्यान देना चाहिए था। साथ ही सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन किया जाये, इसके लिए राज्यपाल से बात की जानी थी। तबादला के बाद मुख्य सचिव की भूमिका को लेकर अधिकारियों में ही चर्चा होने लगी है। इतना ही नहीं, जो तबादले हुए हैं, उसमें महत्वपूर्ण तीन पदों पर कोई पदस्थापन भी नहीं हुआ है। आदेश देने के बाद राज्यपाल दिल्ली चले गये। संभवत: वे लौटकर आयेंगे तब इस तबादले में सुधार हो सकता है। इस पूर मामले पर फिलहाल मुख्य सचिव कुछ कहने को तैयार नहीं हैं।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: आइपीएस तबादले में मुख्य सचिव ने की भारी चूक