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संयुक्त साझेदारी

जब दो या दो से अधिक व्यक्ति मिलकर किसी संपत्ति को अपने नाम से खरीदते हैं और संपत्ति दोनों व्यक्तियों के नाम से पंजीकृत कराते हैं, तो ऐसी संपत्ति ज्वॉइंट ओनरशिप के तहत आती है। यदि संपत्ति में दोनों पार्टनर का भाग निर्धारित नहीं किया गया, तो यह माना जाता है कि संपत्ति में दोनों पार्टनर बराबर के भागीदार हैं। संयुक्त भागेदारी के तहत कोई एक पार्टनर प्रॉपर्टी संबंधी फैसले नहीं ले सकता। एक साझीदार की मृत्यु होने या किसी दुर्घटना की स्थिति में मानसिक रूप से अस्वस्थ होने पर संपत्ति की बिक्री, उसे किराए पर देना, शीर्षक का हस्तांतरण संबंधी फैसले एक पार्टनर द्वारा किए जा सकते हैं।
यदि एक साझीदार की मृत्यु संपत्ति को अपने उत्तराधिकारी को बिना नामांकित किए हो जाती है या उस हिस्से के शेयर का भुगतान कर दिया जाता है तो एक साझीदार के पास संपत्ति का एकल स्वामित्व हो जाएगा। यह भुगतान बाजार की स्वीकृत कीमत पर आधारित होता है। यह कार्य प्रॉपर्टी की कीमत निर्धारण करने वाले प्रोफेशनल को भी सौंपा जा सकता है।
यदि दोनों साझीदार संपत्ति को आपसी समझौते के तहत बेचना चाहते हैं, तो सेल डीड क्रेता और विक्रेता को मिलाते हुए त्रिपक्षीय समझौते को शामिल करके बनेगी। संपत्ति बेचने पर प्राप्त हुई राशि समझौते के तहत आपस में बंट जाएगी। यदि पति-पत्नी किसी संपत्ति के साङीदार हैं तो जब तक स्पष्ट न बताया जाए, दोनों बराबर के हकदार होंगे। तलाक की स्थिति में दोनों को उनका हिस्सा मिलेगा।
संयुक्त साझेदारी के तहत अधिकारों का हस्तांतरण या बदलाव या पॉवर ऑफ अटोर्नी पर हस्ताक्षर करना मुश्किल होता है। मसलन यदि एक पार्टनर वित्तीय संकट की स्थिति में संपत्ति बेचना चाहता है और दूसरा ऐसा नहीं चाहता तो संपत्ति के विवाद की स्थिति उत्पन्न हो जाएगी। ऐसी स्थिति में या तो दूसरा साझीदार पूरी संपत्ति खरीद ले या दूसरे की जरूरत पूरा करे, इस तरह की स्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं।

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