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सेना करती है यहां शक्ति की आराधना

भारतीय सेना ने दशकों पहले नवाबों की नगरी लखनऊ में शक्ति की देवी दुर्गा की आराधना आम जनता के साथ करने की जो अनूठी परम्परा शुरु की थी वह आज भी कायम है।

अपने परिजनों से सैकडो़ किलोमीटर दूर सैनिक व अफसर अपनी व्यस्त दिनचर्या के बीच यहां छावनी क्षेत्र में स्थित दुर्गाबाडी़ में स्थानीय जनता के साथ दुर्गापूजा महोत्सव पूरी श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाते है।

वर्ष 1951 में सेना के तत्कालीन ब्रिगेडियर अजायब सिंह, सब एरिया कमांडर एसएन माथुर और छावनी बोर्ड के कार्यकारी अधिकारी बीएन लाल ने स्थानीय लोगों के साथ मिलकर संयुक्त रुप से दुर्गापूजा मनाने की यह परम्परा शुरू की थी। शुरुआती वर्ष में यह आयोजन कालीपूजा तक सीमित रहा लेकिन बाद में इस पूजा कार्य के लिए कैन्टोनमेन्ट पूजा सेवा समिति का गठन कर दिया गया।

समिति पूजा के साथ साथ समाजसेवा भी करती हैं। समिति की देखरेख में वर्ष 1952 से शुरू हुआ दुर्गापूजा का आयोजन साल दर साल परवान चढ़ता रहा। वर्ष 1981 में मेजर जनरल एससी सिन्हा के प्रयास से समिति को छावनी क्षेत्र में पट्टे पर भूमि उपलब्ध करा दी। समिति के मीडिया प्रभारी बीआर दास ने कहा कि उत्तर प्रदेश के गिनेचुने दुर्गापूजा पंडालों में शुमार दुर्गा बाडी़ का पंडाल दशकों से सेना और आम जनता के बीच संबंधों को प्रगाढ़ करने में अहम भूमिका निभा रहा है।

उन्होंनें कहा कि 1981 के पहले यह आयोजन मंगल पांडेय रोड पर सिथत पार्क में किया जाता था लेकिन जमीन उपलब्ध हो जाने के बाद स्थाई निर्माण कर इसे भव्यता प्रदान की गई है।

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