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साइना के सोने से भारत ने पाया दूसरा स्थान

साइना के सोने से भारत ने पाया दूसरा स्थान

भारतीय स्टार साइना नेहवाल ने अपेक्षानुरूप प्रदर्शन करते हुए गुरुवार को तीन गेम तक चले संघर्षपूर्ण मुकाबले में मलेशिया की म्यू चू वोंग को पराजित करके भारत को राष्ट्रमंडल खेलों में बैडमिंटन की महिला एकल का स्वर्ण पदक दिलाया।

साइना ने मलेशियाई खिलाड़ी को 19-21, 23-21, 21-13 से हराकर बैडमिंटन में भारत को दिन का दूसरा स्वर्ण पदक दिलाया। इससे पहले ज्वाला गुट्टा और अश्विनी पोनप्पा की महिला युगल जोड़ी ने फाइनल में शिंता मूलिया सारी और लेई याओ की सिंगापुर की जोड़ी को संघर्षपूर्ण मुकाबले में सीधे गेमों में 21-16, 21-19 से हराकर भारत को पहला स्वर्ण पदक दिलाया।

इससे पहले राष्ट्रमंडल खेलों की महिला स्पर्धाओं में भारत के लिए सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन अपर्णा पोपट ने किया था जिन्होंने 1998 क्वालालम्पुर खेलों की महिला एकल स्पर्धा में रजत जबकि चार साल बाद मैनचेस्टर में कांस्य पदक जीता। भारत मौजूदा राष्ट्रमंडल खेलों में चार पदक जीतने में सफल रहा। भारत ने मिश्रित टीम स्पर्धा में रजत जबकि पी कश्यप ने पुरुष एकल में कांस्य पदक भी जीता।

साइना ने वोंग के खिलाफ पहले में 3-1 की बढ़त बनाई लेकिन दुनिया की इस तीसरे नंबर की खिलाड़ी को लय हासिल करने में दिक्कत हो रही थी। भारतीय खिलाड़ी ने इसके बाद कई शाट बाहर मारे और नेट पर भी उलझाए जिससे वोंग ने 9-4 की बढ़त हासिल कर ली। साइना ने कुछ अच्छे क्रास कोर्ट स्मैश के साथ स्कोर 8-9 किया लेकिन इसके बाद उन्हें कुछ शाट बाहर खेलकर मलेशियाई खिलाड़ी को वापसी करने का मौका दिया जिसने 13-8 की बढ़त बनाई।

साइना ने एक बार फिर वापसी करने की कोशिश की और स्कोर 11-13 किया लेकिन इसके बाद उन्होंने लगातार तीन अंक गंवाकर विरोधी को हावी होने का मौका दिया। वोंग 19-15 के स्कोर पर आसानी से पहला गेम जीतने की ओर बढ़ रही थी लेकिन साइना ने स्कोर 19-20 तक पहुंचा दिया। इसके बाद हालांकि साइना दुर्भाग्यशाली रही जब वोंग का शाट नेट से टकराकर साइना के हाफ में गिर गया जिससे भारतीय खिलाड़ी ने गेम गंवा दिया।

दूसरे गेम में साइना ने धीमी शुरुआत करने के बावजूद 8-6 की बढ़त बनाई लेकिन इसके बाद भारतीय खिलाड़ी ने लगातार चार अंक गंवाने के साथ बढ़त भी गंवा दिया। उन्होंने हालांकि कुछ बेजोड़ क्रास कोर्ट स्मैश से स्कोर 11-10 किया और फिर इसे 14-10 किया लेकिन इसके बाद गलतियां करते हुए तीन अंक गंवा दिए। दुनिया की तीसरे नंबर की भारतीय खिलाड़ी ने हालांकि 17-14 के स्कोर के साथ बढ़त बरकरार रखी। लेकिन तभी एक अंक उनके खिलाफ गया जब रैफरी ने विरोधी के आउट शाट को इन करार दिया। इसके बाद स्कोर 20-20 से बराबर हुआ। मलेशियाई खिलाड़ी ने इसके बाद बढ़त बनाई लेकिन साइना ने लगातार तीन अंक बनाकर गेम जीत लिया।

तीसरे और निर्णायक गेम में मलेशियाई खिलाड़ी ने शुरू में कड़ी चुनौती पेश की लेकिन साइना धीरे-धीरे मजबूती हासिल करते हुए अपनी बढ़त मजबूत करती गयी और आखिर में उन्हें यह गेम और मैच जीतने में कोई दिक्कत नहीं हुई।

इससे पहले ज्वाला और अश्विनी की जोड़ी को सारी और याओ की जोड़ी ने कड़ी टक्कर मिली। भारतीय जोड़ी ने पहले गेम में थोड़ा दबदबा बनाया और फिर 17-13 की बढ़त बनाने के बाद पहले गेम जीत लिया। दूसरे गेम में हालांकि बेहद करीबी मुकाबला देखने को मिला और प्रत्येक अंक के लिए कड़ी जंग हुई। दोनों जोड़ियां 8-8 के स्कोर बर बराबर थी जिसके बाद सिंगापुर की जोड़ी ने धीरे धीरे बढ़त बनाने की कोशिश की।

सिंगापुर की जोड़ी एक समय 15-12 से आगे हो गई थी लेकिन ज्वाला और अश्विनी ने वापसी करते हुए 17-17 के स्कोर पर बराबरी पा ली। जब स्कोर 18-18 से बराबर था तब ज्वाला की सर्विस पर सिंगापुर की जोड़ी ने विरोधी किया कि वे तैयार नहीं थे लेकिन रैफरी ने उनकी अपील ठुकराकर भारतीय जोड़ी को अंक दे दिया। भारतीय जोड़ी ने इसके बाद 20-19 की बढ़त बनाई और विरोधी जोड़ी के शाट बाहर खेलते ही भारत को राष्ट्रमंडल खेलों की बैडमिंटन स्पर्धा के महिला वर्ग में पहला स्वर्ण पदक मिल गया। ज्वाला इस जीत के बाद कोर्ट पर ही भावुक होकर रोने लगी।

ज्वाला ने मैच के बाद कहा कि यह अविश्वसनीय मुकाबला था। मैं काफी समय से इस सफलता की तलाश में थी। मेरे लिए यह काफी भावुक क्षण है। ऐसा बहुत कम ही होता है कि मैं कोर्ट पर रोती हूं। अश्विनी भी बहुत अच्छा खेली और काफी अच्छी तरह अपनी भूमिका निभाई।

इससे पहले कीन किएट कू और ई हुई चिन की मलेशियाई जोड़ी ने नाथन राबर्टसन और जेनी वालवर्क की इंग्लैंड की शीर्ष वरीय जोड़ी को 20-22, 21-12 से हराकर सोने का तमगा जीता जबकि दुनिया के नंबर एक खिलाड़ी ली चोंग वेई ने पुरुष एकल में इंग्लैंड के दूसरे वरीय राजीव ओसेफ को बेहद आसानी से 21-10, 21-8 से हराकर मलेशिया को दिन का दूसरा स्वर्ण पदक दिलाया।

कू ने इसके बाद बून हिओंग टैन के साथ मिलकर पुरुष युगल का स्वर्ण भी जीता। कू और टैन ने खिताबी मुकाबले में इंग्लैंड के एंथनी क्लार्क और राबर्टसन को सीधे गेमों में 21-19, 21-14 से हराया।

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