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हॉकी में ऑस्ट्रेलिया ने मारी बाजी, भारत को रजत पदक

हॉकी में ऑस्ट्रेलिया ने मारी बाजी, भारत को रजत पदक

वर्ष 1982 के एशियाई खेलों में पाकिस्तान ने भारत का सपना चकनाचूर किया था और उसके 28 वर्षों के बाद ऑस्ट्रेलिया ने राष्ट्रमंडल खेलों की हॉकी प्रतियोगिता में भारत के सपने को मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम में गुरुवार को 8-0 से ज़मींदोज कर दिया।
 
पाकिस्तान ने 1982 में इसी स्टेडियम में पुरुष हॉकी के फाइनल में भारत को 7-1 से करारी शिकस्त दी थी और अब ऑस्ट्रेलिया ने भारत को राष्ट्रमंडल खेलों के स्वर्ण पदक मुकाबले में 8-0 से ध्वस्त कर यह दिखा दिया कि असली विश्व चैंपियन वही है और भारत को अभी उसके स्तर तक पहुंचने में लंबा वक्त लगेगा।
 
यह कहावत बहुत मशहूर है कि इतिहास खुद को दोहराता है और 28 वर्षों पुराना इतिहास गुरुवार को नेशनल स्टेडियम में फिर दोहरा दिया गया। फर्क इतना ही था कि उस समय भारत के मुकाबले में पाकिस्तानी टीम थी और इस बार विश्व चैंपियन ऑस्ट्रेलिया।
 
ऑस्ट्रेलिया ने दोनों हाफ में चार-चार गोल दागते हुए न केवल नेशनल स्टेडियम में मौजूद हजारों भारतीय समर्थकों को निराश किया बल्कि इस मुकाबले को देखने पहुंचे प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह को भी मायूस कर दिया।

हालांकि भारत खिताबी मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया से पराजित हो गया लेकिन उसके लिए संतोष की बात यही रही कि वह पहली बार राष्ट्रमंडल खेलों की पुरुष हॉकी प्रतियोगिता के फाइनल में पहुंचा और रजत पदक हासिल किया।
 
भारत ने जिस तरह लीग मुकाबले में पाकिस्तान को 7-4 से और फिर सेमीफाइनल में इंग्लैंड को पेनल्टी शूट आउट में हराया था। उसे देखते हुए उम्मीद की जा रही थी कि भारतीय टीम स्वर्ण पदक के मुकाबले में विश्व चैंपियन ऑस्ट्रेलिया के सामने चुनौती तो पेश करेगी लेकिन मैच के पहले दस मिनट को छोड़ दिया जाए तो भारतीय टीम ऑस्ट्रलिया के खिलाफ ठहरती तक नहीं दिखाई दी।
 
ऑस्ट्रेलिया इसी स्टेडियम में फरवरी-मार्च में हुए विश्वकप में भारत को 5-2 से शिकस्त दी थी। उसके बाद टूर्नामेंट के लीग मुकाबले में भारत को फिर 5-2 से हराया और अब तो 8-0 से जीत हासिल कर भारत का सूपडा की साफ कर दिया।
 
नेशनल स्टेडियम में मौजूद लगभग 18 हजार दर्शकों को यह कतई उम्मीद नहीं थी कि भारतीय टीम विश्व चैंपियन के सामने इस कदर नतमस्तक हो जाएगी। इस मुकाबले में भारतीय टीम के खेल को देखकर तो ऐसा लग रहा था कि मानो कोई स्कूली टीम खेल रही हो।
 
भारतीय टीम के खेल में एक अंतरराष्ट्रीय टीम जैसी कोई छाप नहीं दिखाई दी। ऑस्ट्रेलिया ने पहले हाफ में 11 मिनट के अंतराल में तीन गोल दागकर भारत का प्रतिरोध खत्म कर दिया। उसके बाद तो भारतीय टीम सिर्फ मैच पूरा करने की औपचारिकता निभाती रही।

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