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तीर्थोद्भव के नाम से विख्यात है कावेरी का उद्गम स्थल

तीर्थोद्भव के नाम से विख्यात है कावेरी का उद्गम स्थल

भारतीय संस्कृति में नदियों को पवित्र तथा जीवनदायिनी माना गया है। उनके उद्गम स्थलों पर, विशेष अवसरों पर लगने वाले मेलों को भी एक पर्व या उत्सव के रूप में करते हैं। भारत की प्रत्येक नदी के उद्गम स्थल का अपना एक धार्मिक महत्त्व है तथा वे एक तीर्थ के रूप में स्थापित हैं। ऐसा ही एक प्रसिद्ध स्थल है, दक्षिण भारत के कर्नाटक राज्य के ‘कोडमू’ जिले में कावेरी नदी के उद्गम स्थल तला कावेरी का।

‘तुला संक्रमण’ कर्नाटक के निवासियों का एक प्रमुख धार्मिक पर्व है। ‘तीर्थोद्भव’ के नाम से यह मेला कावेरी संक्रमण स्नान या तुला संक्रांति के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन हजारों की संख्या में श्रद्धालु अत्यंत श्रद्धा एवं उल्लास के साथ यहां के पवित्र सरोवर में स्नान कर पूजा-अर्चना करते हैं तथा सरोवर के पवित्र जल को बोतलों या डिब्बों में भरकर अपने घरों के लिए ले जाते हैं। धार्मिक अवसरों पर शुभ कार्य के लिए इस जल का उपयोग किया जाता है। मान्यता है कि ‘देवी कावेरी’ अपने भक्तों को दर्शन देने के लिए जल के अत्यंत वेग के साथ एक फव्वारे के रूप में प्रकट होती हैं। यहां आने वाले श्रद्धालु इसे तीर्थोद्भव के नाम से पुकारते हैं। तला कावेरी का मंदिर ब्रह्मगिरि के प्राकृतिक दृश्यों से भरपूर, पहाड़ी के मध्य स्थित है। नदी के उद्गम स्थल से मंदिर तक का रास्ता सीढ़ीनुमा बना है। मंदिर के पूरे क्षेत्र का विहंगम दृश्य मन मोह लेता है।

यहां आने वाले यात्री, इस क्षेत्र के अन्य धार्मिक मंदिरों तथा दर्शनीय स्थलों को देखना नहीं भूलते। धार्मिक स्थलों में 19वीं शताब्दी में ‘कोडमू’ के शासकों द्वारा बनवाया ओंकारेश्वर मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। भागमंडल में कावेरी, कणिका तथा सुज्योथि नदी के संगम स्थल पर बने भिन्न-भिन्न देवी-देवताओं के मंदिरों में भी दर्शनों के लिए श्रद्धालु अवश्य जाते हैं।
अन्य दर्शनीय स्थलों में पर्यटकों के विशेष आकर्षण का केन्द्र है राजा की सीट। इसका नाम राजा की सीट इसलिए पड़ा, क्योंकि इसी स्थान पर राजा अपने परिवार के सदस्यों के साथ मनोरंजन एवं आमोद-प्रमोद के क्षण बिताने आते थे। यहां से सूर्योदय एवं सूर्यास्त के दृश्यों का आनंद उठाया जा सकता है। जिले का मुख्यालय मडेकरी कॉफी, इलायची तथा अन्य मसालों के बागानों तथा घने जंगलों  पश्चिमी घाट के ढलान पर स्थित होने के कारण एक आदर्श पिकनिक स्थल के रूप में भी प्रसिद्ध है। ‘वाइल्ड लाइफ’ प्रेमियों के लिए ‘नागरहोल’ स्थित ‘राजीव गांधी नेशनल पार्क’ एक यादगार विजिट होती है।

कैसे पहुंचें : निकटतम हवाई अड्डा बैंगलौर यहां से 260 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

सड़क मार्ग : मैसूर से 120 किलोमीटर तथा मंगलौर से 136 किलो मीटर की दूरी पर है। मडेकरी मुख्यालय से 9 किलोमीटर है।

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